भारत और अमेरिका के बीच एआई और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने वाला समझौता
भारत और अमेरिका के बीच एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान 'पैक्स सिलिका' समझौते पर हस्ताक्षर की तैयारी चल रही है। यह पहल एआई और तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाने पर केंद्रित है। अमेरिका ने पहले भारत को इस पहल में शामिल नहीं किया था, लेकिन अब दोनों देशों के बीच सकारात्मक संवाद हो रहा है। जानें इस समझौते के पीछे की रणनीति और भारत की बढ़ती भूमिका के बारे में।
Feb 21, 2026, 11:18 IST
भारत और अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण समझौते की तैयारी
नई दिल्ली में चल रहे एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौते की प्रक्रिया तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देश शुक्रवार को 'पैक्स सिलिका' नामक घोषणा पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यह अमेरिकी नेतृत्व वाली पहल एआई और उन्नत तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने पर केंद्रित है।
पैक्स सिलिका पहल का महत्व
पिछले महीने, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने संकेत दिया था कि भारत को इस पहल में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा। इसके बाद से दोनों देशों के बीच बातचीत में तेजी आई है। वर्तमान में, अमेरिकी विदेश विभाग के आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग नई दिल्ली में हैं और शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।
पैक्स सिलिका की शुरुआत और उद्देश्य
‘पैक्स सिलिका’ पहल की शुरुआत 12 दिसंबर 2025 को हुई थी, जिसका उद्देश्य 'मैत्रीपूर्ण और विश्वसनीय' देशों के साथ मिलकर एक सुरक्षित, नवाचार-आधारित सिलिकॉन आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना है। इसमें महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा संसाधन, उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, एआई अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं। इसे वैश्विक विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला में चीन की पकड़ के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
भारत की भागीदारी की संभावना
जब यह पहल शुरू हुई थी, तब अमेरिका ने जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगी देशों का नाम लिया था, लेकिन भारत का नाम नहीं था। इस पर नई दिल्ली में चिंता जताई गई थी कि यह व्यापार समझौते में अनिश्चितता का संकेत हो सकता है।
सकारात्मक प्रगति और तकनीकी सहयोग
हालांकि, राजनयिक सूत्रों के अनुसार, राजदूत गोर के भारत आगमन के बाद दोनों देशों के बीच संवाद में सकारात्मक प्रगति हुई है और द्विपक्षीय व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बन गई है। ऐसे में 'पैक्स सिलिका' में भारत की संभावित भागीदारी को नई प्रौद्योगिकी सीमाओं, विशेषकर एआई और सेमीकंडक्टर में साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
संवेदनशील तकनीकों की सुरक्षा
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह पहल संवेदनशील तकनीकों और महत्वपूर्ण अवसंरचना को 'चिंता वाले देशों' के अनावश्यक नियंत्रण से बचाने पर भी केंद्रित है। इसमें सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी प्रणाली, फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क, डाटा सेंटर, फाउंडेशनल एआई मॉडल और अनुप्रयोगों को सुरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र के तहत विकसित करने की योजना शामिल है। भारत पहले भी अपने दूरसंचार और अन्य महत्वपूर्ण अवसंरचना में चीनी भागीदारी को लेकर सतर्क रहा है।
अमेरिकी कंपनियों का निवेश
भारत की इस पहल में एंट्री ऐसे समय हो रही है जब अमेरिकी कंपनियां भारतीय एआई अवसंरचना में बड़े निवेश की घोषणा कर चुकी हैं। शिखर सम्मेलन में शीर्ष अमेरिकी तकनीकी दिग्गजों की मौजूदगी, जैसे सुंदर पिचाई और सैम ऑल्टमैन, को भारत की बढ़ती रणनीतिक अहमियत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
भारत की वैश्विक साझेदारियों की दिशा
विश्लेषकों का मानना है कि सेमीकंडक्टर मिशन और एआई प्रतिस्पर्धा में अपेक्षाकृत देर से शुरुआत करने के बावजूद, भारत अब वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। 'पैक्स सिलिका' में शामिल होना न केवल आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण की दिशा में कदम होगा, बल्कि यह भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाई देने वाला मोड़ साबित हो सकता है।