भारत और अमेरिका के बीच एआई और तकनीकी सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण समझौता
भारत और अमेरिका के बीच एआई और तकनीकी सहयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते की तैयारी चल रही है। 'पैक्स सिलिका' पहल के तहत, दोनों देश एक सुरक्षित और विश्वसनीय तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। इस समझौते का उद्देश्य संवेदनशील तकनीकों की सुरक्षा और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करना है। जानें इस पहल के पीछे की रणनीति और भारत की भूमिका के बारे में।
Feb 20, 2026, 23:01 IST
भारत-अमेरिका के बीच नई रणनीतिक साझेदारी
नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौते की तैयारी तेज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देश शुक्रवार को 'पैक्स सिलिका' नामक घोषणा पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यह पहल अमेरिकी नेतृत्व में एआई और उन्नत तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने पर केंद्रित है।
पैक्स सिलिका पहल का महत्व
पिछले महीने, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने संकेत दिया था कि भारत को इस पहल में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा। इसके बाद से दोनों देशों के बीच बातचीत में तेजी आई है। वर्तमान में, अमेरिकी विदेश विभाग के आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग नई दिल्ली में हैं और शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।
पैक्स सिलिका की शुरुआत और उद्देश्य
यह पहल 12 दिसंबर 2025 को शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य 'मैत्रीपूर्ण और विश्वसनीय' देशों के साथ मिलकर एक सुरक्षित, नवाचार-आधारित सिलिकॉन आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना है। इसमें महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा संसाधन, उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, एआई अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं। इसे वैश्विक विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला में चीन के प्रभुत्व का विकल्प माना जा रहा है।
भारत की भागीदारी की संभावनाएं
जब यह पहल शुरू की गई थी, तब अमेरिका ने जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगी देशों का उल्लेख किया था, लेकिन भारत का नाम नहीं था। इस पर नई दिल्ली में चिंता जताई गई थी कि यह व्यापार समझौते में अनिश्चितता का संकेत हो सकता है।
राजनयिक संवाद में प्रगति
हालांकि, राजनयिक सूत्रों के अनुसार, राजदूत गोर के भारत आगमन के बाद दोनों देशों के बीच संवाद में सकारात्मक प्रगति हुई है और द्विपक्षीय व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनी है। ऐसे में 'पैक्स सिलिका' में भारत की संभावित भागीदारी को नई प्रौद्योगिकी सीमाओं, विशेषकर एआई और सेमीकंडक्टर में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
संवेदनशील तकनीकों की सुरक्षा
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह पहल संवेदनशील तकनीकों और महत्वपूर्ण अवसंरचना को 'चिंता वाले देशों' के अनावश्यक नियंत्रण से बचाने पर भी केंद्रित है। इसमें सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी प्रणाली, फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क, डाटा सेंटर, फाउंडेशनल एआई मॉडल और अनुप्रयोगों को सुरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र के तहत विकसित करने की योजना शामिल है। भारत पहले भी अपने दूरसंचार और अन्य महत्वपूर्ण अवसंरचना में चीनी भागीदारी को लेकर सतर्क रहा है।
अमेरिकी कंपनियों का निवेश
भारत की इस पहल में शामिल होने का समय महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिकी कंपनियों ने भारतीय एआई अवसंरचना में बड़े निवेश की घोषणा की है। शिखर सम्मेलन में प्रमुख अमेरिकी तकनीकी दिग्गजों की उपस्थिति, जैसे सुंदर पिचाई और सैम ऑल्टमैन, भारत की बढ़ती रणनीतिक अहमियत का संकेत देती है।
भारत की वैश्विक साझेदारियों की दिशा
विश्लेषकों का मानना है कि सेमीकंडक्टर मिशन और एआई प्रतिस्पर्धा में अपेक्षाकृत देर से शुरुआत करने के बावजूद, भारत अब वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। 'पैक्स सिलिका' में शामिल होना न केवल आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण की दिशा में एक कदम होगा, बल्कि यह भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला मोड़ साबित हो सकता है।