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भारत और अमेरिका के बीच नए व्यापार समझौते की तैयारी

भारत और अमेरिका एक नए व्यापार समझौते के अंतिम चरण में हैं, जिसमें टैरिफ और बाजार पहुंच जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा चल रही है। अमेरिकी प्रशासन की 'सेक्शन 301' जांच के बाद इस डील पर मुहर लगने की उम्मीद है। भारत की अपेक्षाएँ हैं कि समझौते के बाद कोई नया टैरिफ नहीं लगाया जाएगा, जिससे उसके निर्यातकों को प्रतिस्पर्धा में बने रहने में मदद मिलेगी। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करना और व्यापारिक बाधाओं को दूर करना है। जानें इस समझौते की संभावनाएँ और इसके प्रभाव।
 

नई दिल्ली में व्यापार वार्ता


नई दिल्ली: भारत और अमेरिका एक नए व्यापार समझौते के अंतिम चरण में पहुंच गए हैं, और दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बातचीत लगातार जारी है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा शुरू की गई 'सेक्शन 301' जांच के पूरा होने के बाद इस डील पर अंतिम मुहर लग सकती है।


दोनों देशों के प्रतिनिधि टैरिफ, बाजार पहुंच और व्यापार नियमों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा कर रहे हैं। इस बीच, एक सकारात्मक खबर यह है कि अमेरिका द्वारा लगाया गया 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त होने की संभावना है। इसके बाद, व्यापार सामान्य 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' दरों पर होगा, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार निर्धारित होती हैं।


भारत की अपेक्षाएँ और आवश्यकताएँ

नए टैक्स से सुरक्षा: भारतीय अधिकारी अमेरिकी सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं कि समझौते के बाद उन पर कोई नया टैरिफ नहीं लगाया जाएगा।


प्रतिस्पर्धा में बने रहना: भारत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिकी बाजार में उसके निर्यातकों को अन्य देशों की तुलना में नुकसान न उठाना पड़े और उनकी स्थिति मजबूत बनी रहे।


आर्थिक मजबूती: इस समझौते का मुख्य लक्ष्य दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करना, व्यापारिक बाधाओं को दूर करना और कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसरों की खोज करना है।


वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पहले इस डील को मार्च तक पूरा करने की योजना बनाई थी, लेकिन अब इसकी समय-सीमा बढ़ाकर जुलाई के अंत तक निर्धारित की गई है।


‘सेक्शन 301’ जांच का महत्व

क्या है 'सेक्शन 301' जांच: इस बातचीत में अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा की जा रही 'सेक्शन 301' जांच की महत्वपूर्ण भूमिका है। USTR अमेरिकी व्यापार नीतियों का प्रबंधन करने वाली प्रमुख एजेंसी है, जिसने हाल ही में भारत सहित 60 देशों की अर्थव्यवस्थाओं की जांच पूरी की है।


नियमों का आधार: अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 के 'सेक्शन 301' के तहत, USTR उन विदेशी नीतियों की जांच करता है जो अमेरिकी व्यवसायों के लिए हानिकारक या भेदभावपूर्ण हो सकती हैं। यदि कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो अमेरिका अतिरिक्त टैक्स लगाने या व्यापारिक लाभ रोकने जैसे कदम उठा सकता है।


प्रस्तावित बदलाव: इस जांच के बाद कुछ वस्तुओं पर अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रस्ताव है, हालांकि 'सेक्शन 232' के अंतर्गत आने वाले कुछ विशेष उत्पादों को इससे बाहर रखा गया है।


कपड़ा उद्योग को राहत की उम्मीद: कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स के लिए एक विशेष व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है, जिससे सीमित मात्रा में भारतीय कपड़े कम टैक्स पर अमेरिकी बाजार में बेचे जा सकेंगे।


जनता और कारोबारियों से राय

राय की प्रक्रिया: राहत की बात यह है कि ये नए टैरिफ नियम अभी अंतिम नहीं हैं। USTR ने कारोबारियों और व्यापारिक संगठनों को इस पर अपनी राय देने के लिए आमंत्रित किया है। इसके लिए 7 जुलाई को सार्वजनिक सुनवाई होगी, जिसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।


यह ध्यान देने योग्य है कि 'सेक्शन 301' का उपयोग 2018 से 2020 के बीच अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के दौरान काफी चर्चा में आया था। पहले इसका मुख्य निशाना चीन था, लेकिन इस बार अमेरिका के कई प्रमुख व्यापारिक साझेदार और मित्र देश भी इसकी जद में आ गए हैं। तमाम चुनौतियों के बावजूद, भारत और अमेरिका दोनों ही एक ऐसा रास्ता निकालने में जुटे हैं जिससे एक-दूसरे के हितों को नुकसान पहुंचाए बिना व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके।