भारत और अमेरिका के व्यापार समझौते पर बातचीत में प्रगति, समझौते के करीब पहुंचने का दावा
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता की स्थिति
(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर - विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर मतभेदों को सुलझाने के लिए बातचीत जारी है, और यह वार्ता अब समझौते के करीब पहुंचने के चरण में है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के मूल तत्वों में कोई बदलाव नहीं आया है। यह टिप्पणी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के एक सप्ताह पहले के बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि बातचीत जारी है, लेकिन आगे रियायत देने की गुंजाइश सीमित है।
‘ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम’ में बातचीत की स्थिति पर पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा, ‘‘हम कुछ चीजों का इंतजार कर रहे हैं। मैं सार्वजनिक रूप से बातचीत का ब्योरा देने में सहज नहीं हूं।’’ उन्होंने बताया कि भारत के व्यापार मंत्री और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से चर्चा कर रहे हैं।
जयशंकर ने कहा, ‘‘जब आप अमेरिका जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ बातचीत करते हैं, तो यह एक ऐसा पहलू है जिस पर आप और अमेरिका सहमत होते हैं।’’ उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की स्थिति स्पष्ट नहीं है, क्योंकि सभी देशों ने अभी तक समझौते नहीं किए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हम समझौते के करीब पहुंच रहे हैं।’’ भारत और अमेरिका 2025 की शुरुआत से व्यापार समझौते पर चर्चा कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य शुल्क संबंधी मतभेदों को सुलझाना और गैर-शुल्क बाधाओं को समाप्त करना है।
भारत चाहता है कि अमेरिकी बाजार में उसके सामान पर प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर शुल्क दरें लागू हों। इस महीने की शुरुआत में, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा था कि दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन यह तुरंत होने की संभावना नहीं है।
जयशंकर ने अमेरिका के नए आर्थिक दृष्टिकोण पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका का शुल्क के उपयोग को लेकर दृष्टिकोण बुनियादी तौर पर अलग है।’’ उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका अपने औद्योगिक उत्पादन को बढ़ाने और अपनी अर्थव्यवस्था तक पहुंच की शर्तों को नए सिरे से तय करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, ‘‘शुल्क को लेकर बहस इसी विषय पर केंद्रित है। अमेरिका में औद्योगिक उत्पादन बढ़ाना और अमेरिकी अर्थव्यवस्था तक पहुंच, ये दोनों मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं। इसलिए हर महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था इस पर अमेरिका के साथ बातचीत कर रही है।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘हम इस मामले में अकेले नहीं हैं। हमारी बातचीत की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है।’’ उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका अपने गठबंधनों और संधियों की शर्तों में बदलाव कर रहा है, जिसका प्रभाव यूरोप और पूर्वी एशिया के कुछ देशों पर भी पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका के साथ कई मुद्दों पर हमारी बातचीत जारी है, लेकिन गठबंधन की शर्तों को लेकर हमारे सामने कोई समस्या नहीं है, क्योंकि हम आधिकारिक तौर पर उसके सहयोगी देश नहीं हैं।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘हमारे पास अमेरिका के साथ एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी है, लेकिन यह केवल एक साझेदारी है, गठबंधन नहीं। पिछले 20 वर्षों में, हमने अमेरिका के साथ सहमति और साझा हितों की पहचान की है, जिन पर हम मिलकर काम करना चाहते हैं। मुझे नहीं लगता कि इसमें कोई बुनियादी बदलाव आया है।’’