भारत और आसियान के बीच कृषि सहयोग के लिए नई कार्ययोजना की शुरुआत
भारत और आसियान के बीच कृषि सहयोग
भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) ने कृषि और वानिकी में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक नई पांच वर्षीय कार्ययोजना पर सहमति बनाई है। यह निर्णय नई दिल्ली में आयोजित नौवीं मंत्री-स्तरीय बैठक में लिया गया। इस बैठक की सह-अध्यक्षता फिलिपींस के कृषि मंत्री फ्रांसिस्को पी. तियू लॉरेल और भारत के केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की।
बैठक के बाद जारी एक बयान में बताया गया कि 2026 से 2030 तक की नई आसियान-भारत मध्यम-अवधि कार्ययोजना चार प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देगी। इनमें नीतिगत बातचीत और व्यापार, संस्थागत नेटवर्किंग, डिजिटल नवाचार, तकनीकी सहयोग, संयुक्त अनुसंधान, और किसानों के आदान-प्रदान के साथ मानव संसाधन विकास शामिल हैं। मंत्रियों ने इस योजना को लागू करते समय व्यावहारिक और किसान-केंद्रित पहल को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई।
सहयोग के लिए पहचाने गए क्षेत्रों में कम उत्सर्जन वाली धान की खेती, जल उत्पादकता, कृत्रिम मेधा का उपयोग, मिट्टी का स्वास्थ्य, जलवायु-अनुकूल फसलें, खाद्य सुरक्षा, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना, और टिकाऊ वन प्रबंधन शामिल हैं।
बैठक में 2021-25 की मौजूदा योजना के तहत की गई प्रगति की समीक्षा भी की गई। इसमें 2023 में जकार्ता और नई दिल्ली में आयोजित आसियान-भारत मिलेट्स सम्मेलन और 2024 में शुरू किए गए आसियान-भारत फेलोशिप कार्यक्रम की उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। इस कार्यक्रम के तहत आसियान देशों के छात्रों को कृषि और संबंधित विज्ञान में पांच वर्षों के लिए 50 मास्टर छात्रवृत्तियाँ दी जाएंगी।
मंत्रियों ने वैश्विक अनिश्चितताओं जैसे जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक तनाव, उर्वरक और ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव, और व्यापार में रुकावट के कारण मजबूत खाद्य और कृषि आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने क्षेत्रीय निगरानी, शुरुआती चेतावनी प्रणालियों, और आपूर्ति के विविध स्रोतों की आवश्यकता को रेखांकित किया, जिसमें छोटे किसानों और कमजोर समूहों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों को नई योजना को एक 'परिणाम-उन्मुख' कार्य कार्यक्रम में बदलने का कार्य सौंपा गया।
इसके अलावा, मंत्रियों ने सहमति जताई कि इस बैठक का दसवां संस्करण 2028 में आयोजित किया जाएगा।