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भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए एक बिजनेस फोरम का आयोजन किया गया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने संभावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चर्चा की और व्यापारिक सहयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त निवेश, विनिर्माण और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग की अपील की। इसके अलावा, दवा, कृषि और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने के सुझाव दिए गए। जानें इस संबंध में और क्या कहा गया।
 

भारत-उज्बेकिस्तान व्यापार संबंधों में वृद्धि


नई दिल्ली: भारत और उज्बेकिस्तान अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। नई दिल्ली में आयोजित भारत-उज्बेकिस्तान बिजनेस फोरम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दोनों देशों के बीच संभावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर विचार करने का संकेत दिया और व्यापारिक सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया।


एफटीए से व्यापार को नई दिशा

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच की रणनीतिक साझेदारी आपसी विश्वास और साझा विकास के लक्ष्यों पर आधारित है। उन्होंने उद्योग जगत से संयुक्त निवेश, विनिर्माण और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग करने की अपील की। उनका मानना है कि यदि दोनों देश व्यापारिक बाधाओं को कम करें, मानकों की पारस्परिक मान्यता को बढ़ावा दें और डिजिटल कस्टम व्यवस्था को मजबूत करें, तो अगले तीन वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना किया जा सकता है। संभावित एफटीए इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।


निवेश और उद्योगों में सहयोग बढ़ेगा

मंत्री ने बताया कि 2025 से लागू होने वाली द्विपक्षीय निवेश संधि निवेशकों को सुरक्षा, पारदर्शिता और विवाद की स्थिति में कानूनी संरक्षण प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान खनन और कपास उत्पादन में मजबूत है, जबकि भारत वस्त्र उद्योग और विनिर्माण में अग्रणी है। दोनों देश मिलकर वैश्विक बाजार के लिए परिधान, डिजाइन और औद्योगिक उत्पादों का उत्पादन बढ़ा सकते हैं, जिससे निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।


दवा, कृषि और डिजिटल क्षेत्र पर विशेष ध्यान

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत को दुनिया की 'फार्मेसी' के रूप में जाना जाता है और वह सस्ती दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, टेलीमेडिसिन और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से उज्बेकिस्तान की सहायता कर सकता है। उन्होंने आयुर्वेद, योग और यूनानी चिकित्सा में सहयोग बढ़ाने का सुझाव भी दिया। इसके अलावा, कृषि, फूड प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, एग्री-टेक, फिनटेक, मेडटेक और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों को भविष्य की साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण बताया।


बढ़ते व्यापार पर दोनों देशों की नजर

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच व्यापार 756.6 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। भारत से दवाइयां, मशीनरी, वाहन पुर्जे और मोबाइल फोन का निर्यात होता है, जबकि उज्बेकिस्तान से फल-सब्जियां, उर्वरक और अन्य कृषि उत्पाद आयात किए जाते हैं। सरकार का मानना है कि एफटीए लागू होने पर बाजार तक पहुंच आसान होगी, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और दोनों देशों के आर्थिक संबंध नई गति पकड़ेंगे।