भारत और ओमान के बीच नया व्यापार समझौता: ऊर्जा और कच्चे माल की सप्लाई में मजबूती
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का संकट
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज', जो दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्ग है, पूरी तरह से बंद हो गया है। पिछले तीन महीनों से इस मार्ग पर संकट बना हुआ है, जिससे वैश्विक ऊर्जा और तेल की आपूर्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस कठिनाई के बीच, भारत ने एक नया और सुरक्षित मार्ग खोज निकाला है, जिसे 'ओमान' कहा जाता है। 1 जून 2026 से भारत और ओमान के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौता लागू हुआ है, जिसे कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) के नाम से जाना जाता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, जब भी खाड़ी क्षेत्र में संकट आएगा, यह समझौता भारत के लिए 'प्लान बी' का काम करेगा, जिससे व्यापार और तेल-गैस की आपूर्ति में कोई रुकावट नहीं आएगी.
ओमान का महत्व
सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे खाड़ी देशों से आने वाला कच्चा तेल और गैस 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' से होकर गुजरता है, जो दुनिया के एक चौथाई समुद्री तेल व्यापार का मार्ग है। वर्तमान में अमेरिका-ईरान के संघर्ष के कारण यह मार्ग खतरनाक हो गया है, जिससे भारत में तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। ऐसे में ओमान भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोगी बन गया है। ओमान की कुल जनसंख्या केवल 55 लाख है और इसकी जीडीपी लगभग 9,130 अरब रुपये है। ओमान का समुद्र तट अन्य खाड़ी देशों की तुलना में अधिक सुरक्षित है, जिससे यह युद्ध के प्रभाव से बाहर है.
दुक्म बंदरगाह की भूमिका
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, ओमान के दो प्रमुख बंदरगाह, 'पोर्ट ऑफ सलालाह' और 'पोर्ट ऑफ दुक्म', हमेशा सुरक्षित और खुले रहते हैं। यदि 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' बंद हो जाता है, तो भी भारत के बड़े जहाज इन बंदरगाहों तक आसानी से पहुंच सकते हैं। इसलिए, संकट के समय में ओमान भारत के लिए एक भरोसेमंद व्यापारिक दरवाजा बना रहेगा। यह समझौता न केवल व्यापार को बढ़ावा देने के लिए है, बल्कि भारत में तेल और गैस की आपूर्ति को मजबूत करने के लिए भी आवश्यक है.
ओमान से व्यापार में वृद्धि
खाड़ी देशों में तनाव के कारण भारत का व्यापार अन्य देशों के साथ कम हो गया है। जीटीआरआई के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 में भारत ने 1,245 अरब रुपये का सामान आयात किया, जो अप्रैल 2026 में घटकर 813 अरब रुपये रह गया। हालांकि, ओमान से भारत आने वाला सामान 246.4% की वृद्धि के साथ 35 अरब 69 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 124 अरब 50 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह वृद्धि मुख्य रूप से कच्चे तेल और यूरिया खाद की खरीद के कारण हुई है.
भारतीय कारोबारियों के लिए लाभ
इस नए व्यापार समझौते के तहत, ओमान भारत से आने वाले लगभग 98% सामानों पर से कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह हटा देगा, जो भारत के कुल निर्यात का 99% हिस्सा है। वित्तीय वर्ष 2026 में भारत ने ओमान को लगभग 332 अरब रुपये का सामान बेचा, जिसमें रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद शामिल हैं। अजय श्रीवास्तव के अनुसार, ओमान में पहले से ही 5% का टैक्स था, जो अब खत्म हो जाएगा, जिससे भारतीय सामान की कीमतें कम होंगी.
ओमान को होने वाले लाभ
यह समझौता ओमान के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि यह भारत को ऊर्जा उत्पादों, खाद और औद्योगिक कच्चे माल की आपूर्ति करने की अपनी स्थिति को मजबूत करेगा। वित्तीय वर्ष 2026 में भारत ने ओमान से 597 अरब 60 करोड़ रुपये का सामान आयात किया, जिसमें कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस शामिल हैं। इसके बदले में, भारत भी ओमान के लिए लगभग 78% सामानों पर टैक्स कम या खत्म कर देगा, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे.