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भारत और दक्षिण अफ्रीका ने व्यापार समझौते की वार्ता शुरू की

भारत और दक्षिण अफ्रीका ने आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए तरजीही व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करने की योजना बनाई है। इस प्रक्रिया में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की उपस्थिति में संदर्भ एवं शर्तों पर हस्ताक्षर किए गए। एसएसीयू में शामिल देशों के साथ व्यापार को बढ़ाने के उद्देश्य से यह वार्ता महत्वपूर्ण है। जानें इस समझौते के पीछे की कहानी और इसके संभावित प्रभाव के बारे में।
 

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच व्यापार संबंधों को मजबूत करने की पहल

भारत और दक्षिण अफ्रीका के नेतृत्व में दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएसीयू) ने आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक तरजीही व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करने की रूपरेखा तैयार की है। इस संदर्भ में, दोनों पक्षों के मुख्य वार्ताकारों ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की उपस्थिति में यहां बातचीत के लिए संदर्भ एवं शर्तों (टीओआर) पर हस्ताक्षर किए। टीओआर में व्यापार वार्ता के दायरे और मुद्दों की रूपरेखा निर्धारित की गई है।


एसएसीयू में दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना, एस्वातिनी, लेसोथो और नामीबिया शामिल हैं। दोनों देशों का लक्ष्य एक वर्ष के भीतर व्यापार समझौते पर बातचीत को पूरा करना है। इस तरजीही व्यापार समझौते के तहत, दोनों साझेदार कई वस्तुओं पर एक-दूसरे को सीमा शुल्क में छूट प्रदान करते हैं, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिलता है।


गोयल ने बताया कि बातचीत की प्रक्रिया में लगभग 20 वर्षों के बाद आज टीओआर पर हस्ताक्षर किए गए हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2006 में इस वार्ता को मंजूरी दी थी, लेकिन पांच दौर की बातचीत के बाद 2010 में यह प्रक्रिया ठप हो गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत पहले से ही दक्षिण अफ्रीकी देशों का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।


भारतीय कंपनियां स्वास्थ्य, दवा, सूचना प्रौद्योगिकी, वाहन निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कई क्षेत्रों में वहां सक्रिय हैं। इन कंपनियों ने दक्षिण अफ्रीका में निवेश किया है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। एसएसीयू में दक्षिण अफ्रीका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।


हालांकि, दोनों देशों के बीच व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में 13.55 प्रतिशत घटकर 15.56 अरब डॉलर रह गया, जो कि 2024-25 में 18 अरब डॉलर था। इसमें भारत का निर्यात 7 अरब डॉलर और आयात 8.56 अरब डॉलर रहा।