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भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर

भारत और न्यूजीलैंड ने आज एक महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना और निवेश को प्रोत्साहित करना है। यह समझौता दोनों देशों के लिए कई लाभ लेकर आएगा, जिसमें शुल्क में कमी और व्यापार में बाधाओं को समाप्त करना शामिल है। जानें इस समझौते के पीछे की रणनीतियाँ और इसके संभावित प्रभाव।
 

भारत-न्यूजीलैंड एफटीए का महत्व

भारत और न्यूजीलैंड आज अपने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच सहमति से तय तारीख से लागू होगा।


एफटीए एक आर्थिक व्यवस्था है जिसमें दो या अधिक देश आपस में व्यापार पर अधिकतम वस्तुओं पर सीमा शुल्क को समाप्त करने या कम करने पर सहमत होते हैं। इसके साथ ही, यह व्यापार और निवेश में आने वाली बाधाओं को भी कम करता है।


एफटीए की वार्ता का इतिहास

इस समझौते की वार्ता 2010 में शुरू हुई थी, लेकिन 2015 में नौ दौर के बाद यह रुक गई। मार्च 2025 में वार्ता फिर से शुरू हुई।


मुख्य तिथियाँ इस प्रकार हैं: 16 मार्च 2025 को वार्ता फिर से शुरू हुई, 22 दिसंबर 2025 को वार्ता पूरी होने की घोषणा की गई, और 27 अप्रैल 2026 को एफटीए पर हस्ताक्षर होने की योजना है।


भारत के लिए संभावित लाभ

इस समझौते के तहत, भारत के श्रम-प्रधान उत्पाद जैसे कपड़ा, प्लास्टिक, चमड़ा और इंजीनियरिंग सामान न्यूजीलैंड में शून्य शुल्क पर प्रवेश करेंगे। वहां का औसत आयात शुल्क केवल 2.3 प्रतिशत है।


न्यूजीलैंड ने 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है। भारत को आईटी, पेशेवर सेवाएं, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में कई अवसर मिलेंगे।


कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए अस्थायी रोजगार वीजा का नया मार्ग खोला जाएगा, जिसमें 5,000 वीजा का कोटा होगा और अधिकतम तीन साल तक रहने की अनुमति होगी।


न्यूजीलैंड के लिए संभावित लाभ

भारत ने अपने ऑस्ट्रेलिया समझौते के मॉडल पर 70 प्रतिशत उत्पाद श्रेणियों पर बाजार पहुंच दी है। एफटीए लागू होने के पहले दिन से न्यूजीलैंड के 54.11 प्रतिशत निर्यात पर भारत में शून्य शुल्क मिलेगा।


इसमें भेड़ का मांस, ऊन, कोयला और लकड़ी उत्पाद शामिल हैं। अन्य कृषि उत्पादों पर शुल्क में रियायत मिलेगी।


संवेदनशील वस्तुओं की सुरक्षा

भारत ने किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के हितों की रक्षा के लिए कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में कोई शुल्क रियायत नहीं दी है।


इनमें दुग्ध, पशु उत्पाद, सब्जियां, चीनी, और तांबा शामिल हैं।


निवेश की संभावनाएँ

न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लाने का वादा किया है।


भारत के लिए यह एफटीए एक उच्च-आय, नियम-आधारित प्रशांत बाजार तक पहुंच को मजबूत करेगा।


द्विपक्षीय व्यापार का आंकड़ा

वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 1.3 अरब डॉलर रहा, जिसमें निर्यात 71.1 करोड़ डॉलर और आयात 58.71 करोड़ डॉलर था।


2024 में कुल वस्तु एवं सेवा व्यापार लगभग 2.4 अरब डॉलर रहा।