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भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर चर्चा

भारत और यूरोपीय संघ ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर चर्चा की है, जो दिसंबर में हस्ताक्षरित होने की योजना है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने ब्रसेल्स में महत्वपूर्ण बैठकों में भाग लिया, जहां सीमा शुल्क सहयोग और व्यापार सुगमता पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस समझौते से भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों को लाभ होगा। इसके अलावा, हीरा उद्योग के हितधारकों के साथ चर्चा में वैश्विक हीरा मूल्य श्रृंखला और भारत के बढ़ते हीरा बाजार पर भी बात की गई। जानें इस समझौते के संभावित प्रभावों के बारे में।
 

भारत और यूरोपीय संघ के बीच एफटीए वार्ता

भारत और यूरोपीय संघ ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लागू करने से संबंधित मुद्दों पर बातचीत की है। इस समझौते पर दिसंबर में हस्ताक्षर होने की योजना है, जैसा कि सोमवार को एक आधिकारिक बयान में बताया गया। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने पिछले सप्ताह ब्रसेल्स में इन मुद्दों पर चर्चा की।


बैठकों का उद्देश्य

अग्रवाल ने यूरोपीय आयोग के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा महानिदेशालय की डिट्टे जुल जॉर्गनस, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी महानिदेशालय के कोएन डोएन्स और कराधान एवं सीमा शुल्क संघ महानिदेशालय के गेरासिमोस थॉमस से मुलाकात की। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इन बैठकों का मुख्य ध्यान सीमा शुल्क सहयोग, व्यापार सुगमता और भारत-यूरोपीय संघ एफटीए के कार्यान्वयन की तैयारियों पर था।


व्यापारियों के लिए समर्थन

मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने व्यापारियों को समर्थन देने, लेनदेन की लागत को कम करने और वैध व्यापार की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कुशल, पारदर्शी और डिजिटल रूप से सक्षम सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के महत्व को स्वीकार किया। दोनों पक्षों ने 27 जनवरी को इस समझौते के लिए बातचीत पूरी होने की घोषणा की थी, जिससे भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे चमड़ा, कपड़ा और रत्न एवं आभूषण को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी।


हीरा उद्योग पर चर्चा

मंत्रालय ने यह भी बताया कि सचिव ने हीरा उद्योग के हितधारकों से मुलाकात की, जिसमें एंटवर्प के हीरा कारोबार से जुड़े प्रतिनिधि शामिल थे। एंटवर्प, बेल्जियम को दुनिया की हीरा राजधानी माना जाता है। इस चर्चा में वैश्विक हीरा मूल्य श्रृंखला, प्रमाणन एवं पता लगाने संबंधी आवश्यकताएं, जिम्मेदारी से हीरों की खरीद और भारत के बढ़ते हीरा बाजार और विनिर्माण क्षेत्र से उत्पन्न अवसरों पर बात की गई।


भारत और बेल्जियम का सहयोग

भारत और बेल्जियम ने रत्न एवं आभूषण क्षेत्र को सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में पहचाना है। एंटवर्प, मुंबई और सूरत को हीरे के प्रमुख केंद्रों के रूप में मान्यता दी गई है।