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भारत और विश्व बैंक के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की चर्चा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा से मुलाकात की, जिसमें भारत और विश्व बैंक के बीच सहयोग को बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। इस बैठक में विकास नीति वित्तपोषण, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए समर्थन, और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में ऋण साख बढ़ाने के उपायों पर विचार किया गया। सीतारमण ने कृषि और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में प्रौद्योगिकी के उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
 

वित्त मंत्री की विश्व बैंक अध्यक्ष से मुलाकात

वॉशिंगटन, 2 सितंबर: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा से मुलाकात की, जिसमें भारत और इस अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था के बीच सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की गई।


सीतारमण ने मंगलवार को एशविल में जी20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक के दौरान बंगा से बातचीत की। वित्त मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने भारत के साथ विश्व बैंक समूह के निरंतर जुड़ाव की सराहना की और 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर के विकास नीति वित्तपोषण (डीपीएफ) को तेजी से मंजूरी देने का उल्लेख किया।


बयान में यह भी कहा गया कि सीतारमण ने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (आईएफसी) के समर्थन के लिए सिडबी के माध्यम से की गई पहल की प्रशंसा की, जिसे रिकॉर्ड समय में मंजूरी दी गई थी और इसका एमएसएमई क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।


दोनों नेताओं ने भारत और विश्व बैंक समूह के बीच साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की, जिसमें बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी (एमआईजीए) की भूमिका को तलाशना शामिल था। इसका उद्देश्य गारंटी के व्यवस्थित उपयोग और निजी पूंजी को जुटाने के माध्यम से कॉरपोरेट, बुनियादी ढांचे और स्थानीय बॉंड बाजारों को गहरा करना है।


बयान के अनुसार, बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में ऋण साख बढ़ाने के लिए क्षेत्र-आधारित और कार्यक्रम आधारित दृष्टिकोण पर भी चर्चा की गई। बंगा ने भारत के बुनियादी ढांचे में हुए महत्वपूर्ण परिवर्तनों की सराहना की और कहा कि भारत की विकास संबंधी महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देने के लिए विश्व बैंक समूह के साधनों का और अधिक उपयोग किया जा सकता है। इसमें एमआईजीए की भागीदारी और विदेशों में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए राजनीतिक जोखिम बीमा भी शामिल है।


सीतारमण ने भारत में ‘ग्लोबल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर नॉलेज हब’ की स्थापना के लिए विश्व बैंक समूह के साथ सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने कृषि जैसे क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी के उपयोग की संभावनाओं की खोज और इसके शीघ्र कार्यान्वयन की दिशा में प्रगति की उम्मीद जताई।


बयान में कहा गया कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने नए भारत-विश्व बैंक समूह देश साझेदारी ढांचे के तहत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पर्यटन स्थलों के विकास पर भी चर्चा की। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (आईबीआरडी) की नीतिगत और बुनियादी ढांचा सहायता, आईएफसी के निवेश और एमआईजीए की गारंटी को एक समन्वित दृष्टिकोण के तहत जोड़ा जाएगा।


वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने साझेदारी को पारंपरिक ऋणदाता-ऋण लेने वाले संबंध से आगे बढ़ाकर वैश्विक ज्ञान, नवाचार और निजी पूंजी जुटाने के लिए एक रणनीतिक मंच बनाने पर भी चर्चा की। इसमें भारत की व्यापकता और क्रियान्वयन क्षमता को विश्व बैंक समूह की वैश्विक विशेषज्ञता और वित्तीय साधनों के साथ जोड़ा जाएगा।