×

भारत और सिंगापुर के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में उच्चस्तरीय वार्ता

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल सिंगापुर की यात्रा पर हैं, जहां वे आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए उच्चस्तरीय वार्ता कर रहे हैं। 70 सदस्यीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल नए निवेश और प्रौद्योगिकी में साझेदारी के अवसरों की खोज करेगा। चौथी भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक में उन्नत विनिर्माण, डिजिटलीकरण और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में प्रगति की समीक्षा की जाएगी। यह वार्ता दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है।
 

भारत-सिंगापुर आर्थिक वार्ता

(संबंधित कॉपी जोड़ते हुए अतिरिक्त सामग्री के साथ लीड)

नई दिल्ली, 19 अगस्त: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए सिंगापुर की यात्रा पर हैं। यह यात्रा दक्षिण-पूर्व एशिया के वित्तीय केंद्र के साथ उच्चस्तरीय वार्ता के उद्देश्य से की जा रही है।

गोयल के साथ 70 सदस्यीय भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल नए निवेश, व्यापार और प्रौद्योगिकी में साझेदारी के अवसरों की खोज करेगा। वहीं, सीतारमण चौथी भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक (आईएसएमआर) का नेतृत्व कर रही हैं, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर, गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद शामिल हैं।

अधिकारियों के अनुसार, यह बैठक 20 अगस्त को आयोजित की जाएगी। वर्ष 2022 में स्थापित आईएसएमआर दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण आर्थिक तंत्र है, जिसमें उन्नत विनिर्माण, संपर्क, डिजिटलीकरण, स्वास्थ्य, कौशल विकास और स्थिरता जैसे क्षेत्र शामिल हैं। चौथी बैठक में इन क्षेत्रों में प्रगति की समीक्षा की जाएगी और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए नए अवसरों की खोज की जाएगी।

गोयल 19 अगस्त से सिंगापुर की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं और वह कृत्रिम मेधा (एआई), प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य, खाद्य एवं कृषि, लॉजिस्टिक, समुद्री क्षेत्र और व्यापार जैसे विभिन्न क्षेत्रों के करीब 70 उद्योगपतियों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, यह व्यापार प्रतिनिधिमंडल निवेश, बाजार पहुंच, प्रौद्योगिकी सहयोग, साझेदारी और प्रतिभा विकास पर केंद्रित सरकार-से-व्यवसाय तथा व्यवसाय-से-व्यवसाय बैठकों में भाग लेगा।

आईएसएमआर के साथ-साथ भारत-सिंगापुर व्यापार गोलमेज बैठक भी आयोजित की जाएगी, जिसमें दोनों देशों के कारोबारी दिग्गजों के लिए समानांतर मंच उपलब्ध होगा। कार्यक्रम में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर समारोह भी होगा।

वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘चौथी आईएसएमआर इन स्तंभों के तहत हुई प्रगति को आगे बढ़ाएगी और भारत-सिंगापुर आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए नए अवसर तलाशेगी।’’

भारतीय मंत्री सिंगापुर के अपने समकक्षों और वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। बयान के अनुसार, गोयल अपनी यात्रा के दौरान सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से भी मिलेंगे।

भारत के लिए सिंगापुर विदेशी पूंजी का एक प्रमुख स्रोत है और दक्षिण-पूर्व एशिया में एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार भी। भारत इन निवेश संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, डिजिटलीकरण और अन्य उभरते क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करना चाहता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत-सिंगापुर व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में काफी वृद्धि हुई है। यह वित्त वर्ष 2004-05 के 6.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 36.1 अरब डॉलर हो गया है।

वित्त वर्ष 2025-26 में सिंगापुर 19.8 अरब डॉलर के साथ भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का सबसे बड़ा स्रोत बना। अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच सिंगापुर से कुल एफडीआई प्रवाह 194.68 अरब डॉलर रहा, जो भारत में कुल एफडीआई प्रवाह का 24.72 प्रतिशत है।

यह मंत्रिस्तरीय एवं व्यापारिक स्तर की बातचीत दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के प्रयासों के बीच हो रही है। पिछली आईएसएमआर बैठकों ने विनिर्माण, संपर्क, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कौशल जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आकार देने में मदद की है।