×

भारत का चमड़ा निर्यात 2026-27 में 5.5 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना

भारत के चमड़ा, जूते-चप्पल और सहायक उत्पादों का निर्यात 2026-27 में 5.5 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। सीएलई के चेयरमैन रमेश कुमार जुनेजा ने बताया कि ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौतों के लागू होने से निर्यात में तेजी आएगी। जानें इस क्षेत्र में रोजगार, उत्पादन और निर्यात को बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में।
 

चमड़ा और जूते-चप्पल का निर्यात

‘काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स’ (सीएलई) के अध्यक्ष रमेश कुमार जुनेजा ने बताया कि भारत से चमड़े, जूते-चप्पल और अन्य सहायक उत्पादों का निर्यात 2026-27 में सालाना 12 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, अगले वित्तीय वर्ष में ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ व्यापार समझौतों के लागू होने से इस क्षेत्र में और तेजी आने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन उत्पादों का निर्यात 4.89 अरब डॉलर था।


ब्रिटेन के साथ व्यापार संभावनाएं

जुनेजा ने कहा कि ब्रिटेन को निर्यात अगले ढाई साल में एक अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। वर्तमान में, भारत से ब्रिटेन को हर साल 60-70 करोड़ डॉलर का निर्यात होता है। भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई, 2026 को लागू होगा, जबकि 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौता अगले वर्ष से लागू होने की उम्मीद है। इस समझौते के तहत भारतीय चमड़े के उत्पादों और जूते-चप्पल को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा।


निर्यात में चुनौतियां और अवसर

जुनेजा ने कहा कि भारत के उत्पादों को वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के उत्पादों की तुलना में मूल्य में कोई विशेष लाभ नहीं मिलेगा। अमेरिका और ईयू भारत के इस क्षेत्र के कुल निर्यात में लगभग 75 प्रतिशत का योगदान देते हैं। उन्होंने बताया कि यह श्रम-प्रधान क्षेत्र वर्तमान में 44.2 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करता है और हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के देशों, ब्रिटेन, ईयू और न्यूजीलैंड के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों के तहत शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच का लाभ उठाने की स्थिति में है।


एमएसएमई के लिए जागरूकता कार्यक्रम

जुनेजा ने कहा कि परिषद विभिन्न राज्यों में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) निर्यातकों के लिए कार्यशालाएं और संगोष्ठियां आयोजित कर रही है ताकि एफटीए के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। उन्होंने सरकार से एमएसएमई के लिए एकीकृत चमड़ा क्षेत्र विकास (आईडीएलएस) योजना को फिर से शुरू करने और तैयार चमड़े पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क हटाने का अनुरोध किया।


प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर ध्यान

जुनेजा ने कहा कि परिषद देश में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आकर्षित करने के उपायों पर भी ध्यान दे रही है। दिल्ली स्थित निर्यातक और वर्सेटाइल ग्रुप के निदेशक मनुज सेठ ने भी सरकार से ‘पीयू फोम’ जैसे प्रमुख कच्चे माल पर आयात शुल्क को तर्कसंगत बनाने का आग्रह किया। सेठ ने कहा कि कच्चे माल की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है, जैसे कि कुशनिंग में इस्तेमाल होने वाले पीयू फोम की कीमत मार्च से अब तक 35-40 प्रतिशत बढ़ गई है। ऐसे उत्पादों पर शुल्क कम करने से घरेलू निर्माताओं को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे निर्यात बढ़ाने और रोजगार सृजन में मदद मिलेगी।