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भारत का चाबहार बंदरगाह पर अडिग रुख: अमेरिका के प्रतिबंधों के बावजूद जारी रहेगा ऑपरेशन

भारत ने चाबहार बंदरगाह के महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद इस परियोजना को जारी रखेगा। विदेश मंत्रालय ने इसे रणनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया है। चाबहार का भौगोलिक स्थान भारत को पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। इसके अलावा, यह INSTC का हिस्सा है, जो भारत को ईरान, रूस और यूरोप से जोड़ता है। भारत ने चाबहार में 10 साल का समझौता किया है और इसे अपनी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी रणनीति का अहम स्तंभ मानता है।
 

भारत का चाबहार बंदरगाह पर स्पष्ट रुख


भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह के संबंध में अपने दृढ़ संकल्प को स्पष्ट किया है, यह दर्शाते हुए कि वह इस महत्वपूर्ण परियोजना से पीछे नहीं हटेगा। हाल के समय में यह विषय चर्चा का केंद्र बना है, क्योंकि चाबहार पोर्ट से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों में दी गई छूट 26 अप्रैल को समाप्त होने वाली है।


विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति को दोहराते हुए कहा है कि चाबहार भारत के लिए रणनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 28 अक्टूबर 2025 को दिशानिर्देश जारी कर 26 अप्रैल 2026 तक सशर्त प्रतिबंधों में छूट को मान्य रखा था। भारत इस अवधि के बाद भी चाबहार में अपने ऑपरेशंस जारी रखने के विकल्पों पर अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है। उनका मानना है कि यह परियोजना केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र की कनेक्टिविटी और स्थिरता से भी जुड़ी हुई है।


चाबहार का भौगोलिक महत्व

चाबहार पोर्ट का सबसे बड़ा महत्व इसका भौगोलिक स्थान है। यह ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित है और भारत को पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। पाकिस्तान द्वारा जमीनी मार्गों पर नियंत्रण के कारण भारत को अफगानिस्तान में व्यापार और सहायता भेजने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। चाबहार इस बाधा को दूर करता है और भारत को एक ऐसा समुद्री मार्ग प्रदान करता है, जो राजनीतिक तनाव और क्षेत्रीय चोकपॉइंट्स से अपेक्षाकृत मुक्त है।


INSTC का हिस्सा

इसके अलावा, चाबहार इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बहु-माध्यम परिवहन नेटवर्क भारत को ईरान, रूस और आगे यूरोप तक जोड़ता है। इस मार्ग के माध्यम से पारंपरिक स्वेज नहर रूट की तुलना में समय और लागत दोनों में कमी आती है, जिससे यूरेशियाई बाजारों के साथ भारत का व्यापार और मजबूत हो सकता है।


चाबहार की ऊर्जा सुरक्षा में भूमिका

ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी चाबहार भारत के लिए महत्वपूर्ण है। यह ईरान और मध्य एशिया से ऊर्जा आयात का एक वैकल्पिक मार्ग बन सकता है, जिससे भारत को सप्लाई रूट्स में विविधता लाने और संवेदनशील समुद्री रास्तों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।


चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के संतुलन में चाबहार

रणनीतिक दृष्टि से, चाबहार को चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत विकसित ग्वादर पोर्ट के संतुलन के रूप में भी देखा जाता है। चाबहार में सक्रिय मौजूदगी से भारत क्षेत्रीय समुद्री कनेक्टिविटी में अपनी भूमिका बनाए रख सकता है। यह बंदरगाह पहले ही मानवीय सहायता के लिए इस्तेमाल किया जा चुका है, जिसमें अफगानिस्तान को खाद्यान्न भेजना शामिल है।


भारत का चाबहार में निवेश

साल 2024 में, भारत ने इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड के माध्यम से चाबहार में एक टर्मिनल के संचालन के लिए 10 साल का समझौता किया था और लगभग 120 मिलियन डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी। भारत ने वर्ष 2003 में ही चाबहार को विकसित करने का प्रस्ताव रखा था और तमाम अड़चनों के बावजूद अब भी इसे अपनी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानता है।