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भारत का चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बढ़ा

भारत का चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बढ़कर 4.2 अरब डॉलर हो गया है। पिछले वर्ष की तुलना में यह वृद्धि दर्शाती है कि देश में विदेशी वस्तुओं और सेवाओं के लिए भुगतान बढ़ा है। इस दौरान, वस्तु व्यापार घाटा भी 86.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि शुद्ध सेवा प्राप्तियां 51.6 अरब डॉलर हो गईं। जानें इस आर्थिक स्थिति के पीछे के कारण और भविष्य की संभावनाएं।
 

चालू खाते का घाटा और वस्तु व्यापार

मुंबई, 1 सितंबर: चालू खाते का घाटा (कैड) वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बढ़कर 4.2 अरब डॉलर, जो कि सकल घरेलू उत्पाद का 0.5 प्रतिशत है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की इसी तिमाही में यह घाटा 3.4 अरब डॉलर यानी जीडीपी का 0.4 प्रतिशत था। चालू खाते का घाटा तब उत्पन्न होता है जब एक देश विदेशी वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और हस्तांतरण के लिए भेजी गई राशि, विदेशों से प्राप्त राशि से अधिक होती है।


वस्तु व्यापार घाटा अप्रैल से जून की तिमाही में 86.1 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में यह 68.9 अरब डॉलर था। हालांकि, इस दौरान शुद्ध सेवा प्राप्तियां बढ़कर 51.6 अरब डॉलर हो गईं, जो एक वर्ष पहले 47.9 अरब डॉलर थीं। आरबीआई ने बताया कि कंप्यूटर सेवाओं, अन्य कारोबारी सेवाओं और परिवहन सेवाओं में सेवा निर्यात में सालाना आधार पर वृद्धि हुई है।


आंकड़ों के अनुसार, विदेशों में कार्यरत भारतीयों द्वारा भेजी गई राशि समेत व्यक्तिगत अंतरण प्राप्तियां चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बढ़कर 42.9 अरब डॉलर हो गईं, जबकि पिछले वर्ष इसी तिमाही में यह 33.2 अरब डॉलर थीं। इसी बीच, अप्रैल से जून की तिमाही में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का शुद्ध प्रवाह 6.1 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 5.2 अरब डॉलर था।