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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6.12 अरब डॉलर बढ़कर 682.35 अरब डॉलर हुआ

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 24 जुलाई को समाप्त सप्ताह में 6.12 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 682.35 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह भी भंडार में वृद्धि हुई थी। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे भंडार ने रिकॉर्ड स्तर को छुआ और इसके पीछे के कारण क्या हैं। इसके अलावा, स्वर्ण भंडार और विशेष आहरण अधिकार के आंकड़ों पर भी चर्चा की जाएगी।
 

विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 24 जुलाई को समाप्त सप्ताह में 6.12 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 682.35 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों में दी गई। पिछले सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार 1.08 अरब डॉलर बढ़कर 676.24 अरब डॉलर पर रहा था।


भंडार का ऐतिहासिक उच्च स्तर

आरबीआई के अनुसार, 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार ने रिकॉर्ड 728.49 अरब डॉलर का सर्वकालिक उच्च स्तर छुआ था। हालांकि, पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते रुपये पर दबाव बढ़ा, जिसके कारण आरबीआई को डॉलर की बिक्री के माध्यम से विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा। इस वजह से कई सप्ताह तक भंडार में गिरावट देखी गई।


विदेशी मुद्रा आस्तियों में वृद्धि

24 जुलाई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा आस्तियां (एफसीए) 4.87 अरब डॉलर बढ़कर 555.93 अरब डॉलर हो गईं। डॉलर के संदर्भ में बताई जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी शामिल होता है।


स्वर्ण भंडार और विशेष आहरण अधिकार

समीक्षाधीन सप्ताह में स्वर्ण भंडार का मूल्य 1.31 अरब डॉलर बढ़कर 103.06 अरब डॉलर हो गया। वहीं, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 5.3 करोड़ डॉलर घटकर 18.62 अरब डॉलर रह गया।


आईएमएफ में भारत का आरक्षित कोष

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत का आरक्षित कोष 1.1 करोड़ डॉलर घटकर 4.75 अरब डॉलर रह गया।