भारत का सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात 2025-26 में 8.2% बढ़ा
आरबीआई का नया सर्वेक्षण
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं (ITES) के निर्यात पर अपने वार्षिक सर्वेक्षण 2025-26 का डेटा जारी किया है। इस सर्वे में भारत के सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात, कंप्यूटर सेवाओं और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) से संबंधित आंकड़े शामिल हैं। इसमें यह बताया गया है कि किन सेवाओं का निर्यात किया गया, किस देश को भेजा गया और कैसे डिलीवर किया गया।
सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात में वृद्धि
RBI के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में भारत का सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में 8.2% बढ़कर 221.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस सर्वे में 7,569 सॉफ्टवेयर निर्यात कंपनियों से संपर्क किया गया, जिनमें से 2,363 ने उत्तर दिया। इन कंपनियों का कुल अनुमानित सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात में लगभग 89% हिस्सा है।
कंप्यूटर सेवाओं का प्रमुख स्थान
सर्वे के अनुसार, भारत के कुल सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात में कंप्यूटर सेवाओं का योगदान सबसे अधिक रहा। 2025-26 में कंप्यूटर सेवाओं का निर्यात 153.4 अरब डॉलर रहा, जो कुल निर्यात का 69.3% है। इसमें IT सेवाओं का हिस्सा 147 अरब डॉलर रहा, जो लगभग 66.4% है।
प्राइवेट कंपनियों का योगदान
RBI के अनुसार, 2025-26 में प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों ने सॉफ्टवेयर निर्यात में सबसे अधिक योगदान दिया। इनका निर्यात 134.6 अरब डॉलर रहा, जो कुल निर्यात का 60.8% है। पिछले वर्ष की तुलना में इसमें 9.3% की वृद्धि हुई। वहीं, सार्वजनिक लिमिटेड कंपनियों का निर्यात 81.7 अरब डॉलर रहा।
अमेरिका और यूरोप का स्थान
भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है, जहां निर्यात 119.7 अरब डॉलर रहा, जो कुल निर्यात का 54.1% है। इसके बाद यूरोपीय देशों का स्थान है, जिन्हें 70.3 अरब डॉलर का निर्यात हुआ।
डॉलर में सबसे अधिक कारोबार
सर्वे के अनुसार, भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात में सबसे अधिक बिलिंग अमेरिकी डॉलर में होती है, जिसकी हिस्सेदारी 72.6% है। इसके बाद यूरो का स्थान है, जिसमें 21.3 अरब डॉलर का कारोबार हुआ।
वर्क फ्रॉम इंडिया का बढ़ता चलन
RBI के सर्वे के अनुसार, भारत की सॉफ्टवेयर सेवाएं मुख्य रूप से ऑफ-साइट मोड में डिलीवर की जाती हैं, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 91.7% है। इससे कुल आय लगभग 203 अरब डॉलर है।
विदेशी शाखाओं का योगदान
यदि भारतीय कंपनियों की विदेशी शाखाओं के जरिए दी गई सेवाओं को भी शामिल किया जाए, तो कुल सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट सर्विस 2025-26 में 9.5% बढ़कर 239.3 अरब डॉलर तक पहुंच गई है।