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भारत की अर्थव्यवस्था पर महंगाई आधारित मंदी का खतरा

भारत की अर्थव्यवस्था को महंगाई आधारित मंदी का खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। आरबीआई के गवर्नर ने सरकार से महंगाई पर नियंत्रण पाने की अपील की है। नुवामा की रिपोर्ट में भू-राजनीतिक तनाव और ईरान संकट के कारण संभावित आर्थिक चुनौतियों का जिक्र किया गया है। जानें इस स्थिति के संभावित प्रभाव और राहत के संकेत क्या हैं।
 

महंगाई आधारित मंदी का जोखिम


भारत में महंगाई आधारित मंदी का खतरा बढ़ सकता है


बिजनेस न्यूज़ अपडेट: हाल ही में आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक के बाद, गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सरकार से महंगाई पर नियंत्रण पाने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो देश की अर्थव्यवस्था को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इसी बीच, वित्तीय सेवा कंपनी नुवामा ने भी इसी तरह की चिंताओं को व्यक्त किया है।


नुवामा की रिपोर्ट में कहा गया है कि भू-राजनीतिक तनाव और ईरान संकट के कारण तेल की आपूर्ति में रुकावट भारत के लिए महंगाई आधारित मंदी का खतरा बढ़ा सकती है। यह चेतावनी सकल घरेलू उत्पाद के विश्लेषण में दी गई है, जबकि देश की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026 को अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन के साथ समाप्त किया।


वित्तीय सेवा फर्म की चेतावनी

नुवामा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2027 अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मार्च तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में सुधार के बावजूद, रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से इनपुट लागत ऊंची बनी रह सकती है। इससे परिवारों की वास्तविक आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।


अर्थव्यवस्था पहले से ही मुद्रास्फीति के दौर में है, और एक लंबा आपूर्ति झटका, विशेषकर कमजोर मानसून के साथ, मुद्रास्फीतिजनित मंदी का खतरा बढ़ा सकता है। महंगाई आधारित मंदी वह स्थिति है जिसमें आर्थिक वृद्धि धीमी होती है जबकि महंगाई उच्च बनी रहती है।


सकारात्मक संकेत

हालांकि, रिपोर्ट में कुछ घरेलू कारकों का भी उल्लेख किया गया है जो नकारात्मक जोखिमों को सीमित कर सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक का कुशल तरलता प्रबंधन इस दिशा में सहायक हो सकता है। रुपये का अपेक्षाकृत कम मूल्यांकन और स्वस्थ ऋण वृद्धि भी गिरावट को कम करने में मदद कर सकती है। वित्त वर्ष 2026 में निवेश में तेजी आई थी, जो मार्च तिमाही में 10.8 फीसदी तक पहुंच गया।