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भारत की आत्मनिर्भरता: प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी का बयान

प्रधानमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भारत की आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि देश एक ऐतिहासिक यात्रा की दहलीज पर है। उन्होंने बताया कि आत्मनिर्भरता का मतलब अलगाव नहीं है, बल्कि यह एक रणनीति है जो देश की मूलभूत क्षमता को विकसित करने पर केंद्रित है। दास ने यह भी कहा कि भारत को विभिन्न स्रोतों से चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इस महत्वपूर्ण व्याख्यान में उन्होंने आर्थिक नीतियों और सुधारों के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
 

भारत की ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत

व्यापार शुल्क में बढ़ते खतरों के बीच, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि सरकार की नीतियों और सुधारों के चलते भारत एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है।


प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास ने विवेक देवराय स्मृति व्याख्यान में कहा कि जब पिछले कुछ दशकों में वैश्वीकरण को बढ़ावा देने वाली आम सहमति कमजोर हुई है और बहुपक्षीय सहयोग प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो गया है, तब भारत ने आत्मनिर्भरता को अपनी नीतियों का केंद्रीय सिद्धांत बना लिया है।


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर दास ने यह स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का अर्थ अलगाव नहीं है, बल्कि यह एक रणनीति है जो मूलभूत क्षमता और लचीलापन विकसित करने पर केंद्रित है।


उन्होंने आगे कहा कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का तात्पर्य है कि देश में महत्वपूर्ण वस्तुओं और प्रौद्योगिकियों का उत्पादन करने की क्षमता विकसित की जाए और विदेशी स्रोतों पर निर्भरता को कम किया जाए। दास ने यह भी कहा कि भारत आज एक ऐतिहासिक यात्रा की दहलीज पर है, और चुनौतियां तथा बाधाएं विभिन्न स्रोतों से आती रहेंगी।