भारत की आर्थिक वृद्धि पर वैश्विक रेटिंग एजेंसियों का बढ़ता भरोसा
भारत की आर्थिक स्थिति में सुधार
दुनिया की प्रमुख रेटिंग एजेंसियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति अपना विश्वास फिर से मजबूत किया है। वैश्विक आर्थिक चिंताओं के बावजूद, भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया है। इसी कारण एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स, फिच रेटिंग्स और मूडीज ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को संशोधित किया है।
रेटिंग एजेंसियों के नए अनुमान
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। इसी तरह, फिच रेटिंग्स ने अपने पूर्वानुमान को 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत किया है। मूडीज ने भी पिछले सप्ताह भारत की वृद्धि का अनुमान 7 प्रतिशत तक बढ़ाया था।
भारत की आर्थिक संभावनाएं
जेपी मॉर्गन चेज के सीईओ जेमी डिमॉन ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताया है। यह सवाल उठता है कि वैश्विक संस्थानों का भारत पर भरोसा अचानक क्यों बढ़ा है।
घरेलू आर्थिक प्रदर्शन का प्रभाव
इसका मुख्य कारण भारत का बेहतर घरेलू आर्थिक प्रदर्शन है। अप्रैल से जून की तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था ने सालाना आधार पर 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो कई अर्थशास्त्रियों के अनुमानों से बेहतर है। इस मजबूत प्रदर्शन के चलते रेटिंग एजेंसियों ने अपने पूर्वानुमान में बदलाव किया है।
विकास के प्रमुख कारक
एसएंडपी के अनुसार, जून तिमाही की वृद्धि औद्योगिक गतिविधियों, मजबूत घरेलू खपत, वस्तुओं के निर्यात और सरकारी निवेश में तेजी से संभव हुई। फिच ने भी बेहतर तिमाही वृद्धि को अपने अनुमान में बदलाव का मुख्य कारण बताया है।
घरेलू खपत की भूमिका
भारत की आर्थिक तस्वीर में घरेलू खपत की महत्वपूर्ण भूमिका है। कई एशियाई मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की वृद्धि विदेशी मांग पर कम निर्भर है। इस प्रकार, वैश्विक व्यापारिक तनावों के बीच घरेलू बाजार ने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है।
निवेश का महत्व
निवेश भी भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण सहारा है। सरकारी पूंजीगत खर्च ने आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एसएंडपी ने जून तिमाही में सरकारी निवेश की बढ़ती रफ्तार को वृद्धि का एक कारण बताया है।
बाहरी झटकों का सामना
भारत की अर्थव्यवस्था ने बाहरी झटकों को संभालने में सफलता पाई है, जो वैश्विक विश्वास का एक बड़ा कारण है। अमेरिका-ईरान तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद वृद्धि दर में बड़ी गिरावट नहीं आई है।
आर्थिक चुनौतियां
हालांकि, तस्वीर पूरी तरह से जोखिम-मुक्त नहीं है। एसएंडपी ने वित्त वर्ष में औसत महंगाई 5.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई है। इसके अलावा, ऊंची तेल कीमतें और खाद्य महंगाई आगे दबाव बढ़ा सकती हैं।
विश्लेषकों की राय
वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. अभिनव पी. त्रिपाठी के अनुसार, रेटिंग एजेंसियां भारत की स्थिति को पहले से बेहतर मान रही हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरा साल बिना किसी चुनौती के गुजरेगा।