भारत की आर्थिक वृद्धि में संभावित मंदी: विश्व बैंक की रिपोर्ट
भारत की आर्थिक रफ्तार में संभावित कमी
नई दिल्ली: विश्व बैंक द्वारा जारी की गई 'ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स' रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि की गति में कमी आ सकती है। इसका मुख्य कारण ईंधन और बिजली की कीमतों में वृद्धि है, जो आम जनता और व्यवसायों पर आर्थिक दबाव डाल रही है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जबकि 2026-27 में यह घटकर 6.6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनियों की उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है, जिससे बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
खर्च करने की क्षमता पर प्रभाव
खर्च करने की क्षमता पर असर
ईंधन की महंगाई से लोगों की खर्च करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे निजी मांग में कमी आ सकती है। हालांकि, सरकार ने महंगाई से राहत देने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी दरों में कमी से परिवारों को राहत मिलेगी, जिससे वे बाजार में खर्च जारी रख सकेंगे। इसके अलावा, सरकार ने ईंधन कर में भी कटौती की है ताकि अचानक बढ़ती कीमतों से आम लोगों और व्यवसायों को बचाया जा सके।
साल की शुरुआत में मजबूत स्थिति
साल की शुरूआत में स्थिति मजबूत
साल की शुरुआत में भारत की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मांग में सुधार देखा गया है, जिसने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी हमारी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा है। अमेरिका जैसे बड़े देशों के साथ नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) और कम कर दरों का लाभ भारत के निर्यात क्षेत्र को मिल सकता है, जिससे वैश्विक मंदी के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।
वैश्विक आर्थिक सुस्ती
पूरी दुनिया में आर्थिक सुस्ती
वैश्विक स्तर पर आर्थिक सुस्ती का माहौल बना हुआ है। 2025 में वैश्विक विकास दर 2.9 प्रतिशत थी, जो 2026 में घटकर 2.5 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो कोरोना महामारी के बाद की सबसे कमजोर वृद्धि है। फिर भी, भारत के लिए भविष्य की संभावनाएं सकारात्मक हैं। विश्व बैंक का मानना है कि इस मामूली गिरावट के बाद, वित्तीय वर्ष 2027-28 में भारत की वृद्धि दर फिर से 7.2 प्रतिशत और 2028-29 में 7.0 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। मजबूत घरेलू मांग और बेहतर निर्यात के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर से शानदार वापसी करेगी।