भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए प्रौद्योगिकी और साझेदारी की आवश्यकता: केंद्रीय मंत्री
वैश्विक अनिश्चितता और भारत की तैयारी
(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर - केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को बताया कि प्रौद्योगिकी में हो रहे परिवर्तनों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और वित्तीय जोखिमों के चलते आने वाले वर्षों में वैश्विक अनिश्चितता में वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी आर्थिक और प्रौद्योगिकी क्षमताओं को मजबूत कर रहा है ताकि बाहरी झटकों से अपनी आर्थिक वृद्धि को सुरक्षित रखा जा सके। 'ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम 2026' में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, सूचना एवं प्रसारण तथा रेल मंत्री वैष्णव ने कहा कि वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाएं विभिन्न देशों और भौगोलिक क्षेत्रों में फैली रहेंगी।
साझेदारी और रणनीतिक निर्भरता
हालांकि, कंपनियों और सरकारों को अपने साझेदारों का निरंतर मूल्यांकन करना आवश्यक है ताकि किसी एक देश या कंपनी पर निर्भरता से संकटों का सामना करने की क्षमता प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी का दायरा वैश्विक स्तर पर फैला रहेगा और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाएं कई सीमाओं और देशों में विस्तारित होंगी। वैष्णव ने कहा, 'रणनीतिक निर्भरता के संदर्भ में यह देखना होगा कि किन देशों पर भरोसा किया जा सकता है और किन स्थानों पर उत्पादन, डिजाइन या किसी देश या कंपनी पर निर्भरता के कारण संकटों का सामना करने की हमारी क्षमता कमजोर नहीं होगी। इन निर्णयों की बार-बार समीक्षा करनी होगी।'
आर्थिक चुनौतियाँ और भविष्य की अनिश्चितता
उन्होंने चेतावनी दी कि तेजी से हो रहे प्रौद्योगिकी परिवर्तनों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज के उच्च स्तर के कारण आने वाले वर्षों में वैश्विक अनिश्चितता बढ़ सकती है। अंततः, इन कर्जों को धीरे-धीरे कम करने से आर्थिक उथल-पुथल और बढ़ सकती है। वैष्णव ने कहा, 'दुनिया जिस दिशा में बढ़ रही है, उसे देखते हुए मेरा मानना है कि आने वाले समय में उथल-पुथल पिछले कई दशकों की तुलना में कहीं अधिक होगी। यह अनिश्चितता प्रौद्योगिकी और वित्तीय क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों से भी उत्पन्न होगी।'
सिस्को के सीईओ का समर्थन
अमेरिका की सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी सिस्को के चेयरमैन और सीईओ चक रॉबिन्स ने भारत के इस दृष्टिकोण का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत के पास महत्वपूर्ण क्षमताएं विकसित करने के लिए एक बड़ा बाजार, इंजीनियरिंग कौशल और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञता है। इसके साथ ही, अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वह भरोसेमंद कंपनियों के साथ साझेदारी कर सकता है। रॉबिन्स ने कहा, 'भारत विशेष रूप से कई अमेरिकी और वैश्विक कंपनियों का भरोसेमंद साझेदार रहा है। इससे ऐसा माहौल बनता है, जहां हम निवेश करने में सहज महसूस करते हैं और मेरे विचार में यह बहुत महत्वपूर्ण है।'