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भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर कतर के LNG उत्पादन ठप होने का प्रभाव

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कतर में LNG उत्पादन ठप हो गया है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। भारतीय कंपनियों ने गैस की आपूर्ति में कमी लाना शुरू कर दिया है, और यदि स्थिति जल्दी सामान्य नहीं होती है, तो गैस की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। सरकार ने वैकल्पिक उपायों की दिशा में कदम उठाने की योजना बनाई है, जिसमें घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का संकेत भी शामिल है।
 

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर


मध्य पूर्व में सैन्य तनाव के बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगा है। कतर में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के उत्पादन में रुकावट के कारण, भारतीय कंपनियों ने उद्योगों को गैस की आपूर्ति में कमी लाना शुरू कर दिया है। यदि स्थिति जल्दी सामान्य नहीं होती है, तो देश में गैस की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा कंपनियां वैकल्पिक उपायों की खोज में जुट गई हैं।


कतर में उत्पादन ठप होने से चिंता बढ़ी

ईरान द्वारा किए गए ड्रोन हमले के बाद, कतर ने अपने LNG निर्यात संयंत्र का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया है। यह संयंत्र विश्व के सबसे बड़े LNG निर्यात केंद्रों में से एक है। कतर, LNG का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है और भारत के कुल LNG आयात का लगभग 50% हिस्सा यहीं से आता है। इस प्रकार, आपूर्ति में रुकावट से वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और कीमतों में वृद्धि की संभावना बढ़ गई है।


भारत की रणनीति और सरकारी कदम

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सरकारी तेल और गैस कंपनियों के प्रमुखों के साथ एक बैठक की। मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि देश में प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और किफायती दाम सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। संकेत मिल रहे हैं कि यदि आवश्यक हुआ, तो घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी और उद्योगों को गैस की आपूर्ति सीमित की जा सकती है।


वैकल्पिक आयात की योजना

पेट्रोनेट LNG लिमिटेड और गेल (इंडिया) लिमिटेड, जिनके पास कतर से दीर्घकालिक समझौते हैं, अतिरिक्त कार्गो के लिए स्पॉट टेंडर जारी करने पर विचार कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार गैस खरीदने के लिए सरकार-से-सरकार समझौते के विकल्प भी तलाश रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कतर और अबू धाबी में उत्पादन लंबे समय तक बाधित रहा, तो एशियाई बाजारों में आपूर्ति पर दबाव और बढ़ेगा।


भाड़ा दरों में वृद्धि और उद्योगों पर प्रभाव

तनाव के बीच, LNG टैंकरों की चार्टर दरें दोगुनी से अधिक हो गई हैं। अटलांटिक क्षेत्र में एक LNG पोत के लिए प्रतिदिन 2 लाख डॉलर से अधिक की मांग की जा रही है, जो पहले की तुलना में लगभग तीन गुना है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का कहना है कि वास्तविक सौदे तभी तेजी से बढ़ेंगे जब उत्पादन में बाधा लंबी चलेगी। इस बीच, भारतीय कंपनियों ने एहतियात के तौर पर औद्योगिक गैस की आपूर्ति में कटौती शुरू कर दी है।