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भारत की ऊर्जा सुरक्षा: रूस और वेनेजुएला से नए अवसर

भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए नई रणनीतियों को अपनाया है, जिसमें रूस से LNG और वेनेजुएला के तेल ब्लॉकों का संचालन शामिल है। यह कदम खाड़ी देशों से ईंधन आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए उठाया गया है। जानें कैसे ये नए अवसर भारत की ऊर्जा रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं और क्या इससे गैस की कीमतें कम हो सकती हैं।
 

भारत की ऊर्जा सुरक्षा की नई दिशा

भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नई रणनीतियों को अपनाया है। खाड़ी देशों से ईंधन की आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए, भारत रूस के आर्कटिक क्षेत्र से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) लाने की योजना बना रहा है। साथ ही, वेनेजुएला के दो प्रमुख तेल ब्लॉकों का संचालन भी अपने हाथ में लेने की तैयारी कर रहा है। रूस के उप-विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने हाल ही में बताया कि भारत आर्कटिक क्षेत्र में तेल और गैस विकास में रुचि दिखा रहा है। भारत और रूस के बीच 2029 तक सहयोग का एक कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। वहीं, वेनेजुएला के नए कानून के तहत ओएनजीसी सैन क्रिस्टोबल और कारोबोबो 1 तेल ब्लॉकों का संचालन करने जा रही है। पहले भारत को वेनेजुएला से सीमित मात्रा में पुराना लाभांश ही प्राप्त होता था, लेकिन नए प्रावधानों से ओएनजीसी को बिना किसी अमेरिकी प्रतिबंध के सीधे कुओं का संचालन करने की अनुमति मिल गई है।


रूसी गैस की संभावनाएँ

भारत में प्राकृतिक गैस की खपत पहले से ही काफी अधिक है। सरकार के अनुसार, देश में लगभग 189 MMSCMD गैस की खपत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन 97.5 MMSCMD है। हाल ही में पश्चिमी एशिया में आपूर्ति में रुकावट के दौरान, लगभग 47.4 MMSCMD की सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे कंपनियों को नए सप्लायर और रास्ते खोजने पड़े। इस स्थिति में रूस एक महत्वपूर्ण सप्लायर बन सकता है, क्योंकि उसके पास गैस के बड़े भंडार हैं। रूस ने भारत को LNG निर्यात करने की संभावना भी जताई है, जिससे भारतीय खरीदारों को एक और विकल्प मिल सकता है। इसके अलावा, सरकार पाइपलाइन नेटवर्क, सिटी गैस वितरण और PNG कनेक्टिविटी का विस्तार करने की कोशिश कर रही है।


क्या गैस की कीमतें कम होंगी?

यह संभव है, लेकिन कई कारक महत्वपूर्ण हैं। रूसी गैस की आपूर्ति से सप्लायर्स के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, जिससे भारतीय खरीदारों को बेहतर मोल-भाव करने का अवसर मिल सकता है। यदि गैस उचित मूल्य पर उपलब्ध होती है, तो इससे उन उद्योगों को लाभ हो सकता है जो प्राकृतिक गैस पर निर्भर हैं, जैसे कि उर्वरक निर्माता और CNG ऑपरेटर। हालांकि, रूस के साथ डील का मतलब यह नहीं है कि गैस अपने आप सस्ती हो जाएगी। अंतिम कीमत कई कारकों पर निर्भर करेगी, जैसे कि अनुबंध, LNG की कीमतें, परिवहन लागत और शिपिंग।


पश्चिम एशिया का संकट: एक सीख

हाल की आपूर्ति में रुकावटों ने भारत को विभिन्न स्रोतों से आपूर्ति प्राप्त करने की आवश्यकता को स्पष्ट किया है। सरकार का कहना है कि भारत अब लगभग 40 देशों से कच्चा तेल मंगाता है। पहले लगभग 55% कच्चा तेल 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' के बाहर के रास्तों से आता था, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 70% हो गया है। प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में भी रुकावटें आई हैं, जिससे भारत ने नए स्रोतों से LNG कार्गो प्राप्त करने की कोशिश की है।


रूस से खरीदारी के जोखिम

भारत की ऊर्जा रणनीति में जोखिम भी शामिल हैं। रूस पर अधिक निर्भरता से भारतीय खरीदारों पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का प्रभाव पड़ सकता है। हाल ही में अमेरिकी सीनेट ने एक बिल पास किया है, जिसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। यह बिल अब अमेरिकी हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स में जाएगा। भारत का लक्ष्य विविधीकरण है, और रूस पर अत्यधिक निर्भरता इस रणनीति को कमजोर कर सकती है।