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भारत की खनिज सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री मोदी का नया दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में भारत की खनिज सुरक्षा को लेकर नई पहल की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि सरकार विभिन्न देशों के साथ समझौतों पर काम कर रही है ताकि महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जा सके। इस मिशन के तहत 16,300 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिसका उद्देश्य देश में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को बढ़ावा देना है। मोदी ने कहा कि तांबा, लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे खनिज स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक हैं।
 

प्रधानमंत्री मोदी का खनिज सुरक्षा पर जोर

शनिवार को, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बताया कि भारत महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि इन संसाधनों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए विभिन्न देशों के साथ समझौतों पर काम किया जा रहा है। मोदी ने लाल किले से 80वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि कई देशों ने भारत के प्रयासों पर भरोसा जताया है।


उन्होंने कहा, "महत्वपूर्ण खनिजों पर चर्चा हो रही है... इन खनिजों के लिए लक्ष्य साझा किए जा रहे हैं। हमने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन की शुरुआत की है और बजट में महत्वपूर्ण खनिज गलियारे की घोषणा की गई है।"


प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि कई देशों के साथ समझौतों पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा, "दुनिया के कई देश इस खोज में भारत पर भरोसा कर रहे हैं।" सरकार ने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) के लिए 16,300 करोड़ रुपये का आवंटन किया है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से 18,000 करोड़ रुपये के योगदान की उम्मीद है।


इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को बढ़ावा देना है। तांबा, लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्व जैसे खनिज स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक कच्चे माल हैं।


इनका उपयोग पवन टर्बाइन, बिजली नेटवर्क, इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी निर्माण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है।