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भारत की गैस आपूर्ति पर संकट: कतर से एलएनजी में भारी कमी

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने भारत की गैस आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कतर से एलएनजी की आपूर्ति में भारी कमी आई है, जिससे देश के फर्टिलाइजर, पावर और सीएनजी सेक्टर में हड़कंप मच गया है। ईरान के हमलों के कारण कतर के गैस संयंत्रों का बंद होना वैश्विक गैस आपूर्ति पर भी असर डाल रहा है। इस स्थिति के चलते भारत को स्पॉट मार्केट का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां कीमतें पहले ही दोगुनी हो चुकी हैं। यदि यह संकट जारी रहा, तो आम आदमी के बजट पर बोझ बढ़ना तय है।
 

भारत की अर्थव्यवस्था पर युद्ध का प्रभाव


नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने अब भारतीय अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। ईरान द्वारा कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और प्रमुख गैस संयंत्रों पर किए गए मिसाइल हमलों के बाद, कतर ने भारत को एलएनजी की आपूर्ति में भारी कमी कर दी है। कतर भारत का सबसे बड़ा गैस आपूर्तिकर्ता है, और इस संकट ने देश के फर्टिलाइजर, पावर और सीएनजी क्षेत्रों में हड़कंप मचा दिया है।


गैस आपूर्ति में कटौती का असर

ईरान ने अमेरिका से प्रतिशोध लेने के लिए कतर की 'रास लफ़्फ़ान' और 'मेसाईद' औद्योगिक क्षेत्रों पर भीषण हमले किए हैं। ये ड्रोन और मिसाइल हमले इतने शक्तिशाली थे कि कतर एनर्जी को अपने गैस उत्पादन संयंत्रों को बंद करने का निर्णय लेना पड़ा। कतर विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस उत्पादक है, और उसके संयंत्रों का बंद होना वैश्विक गैस आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। भारत जैसे बड़े ग्राहकों के लिए यह स्थिति एक गंभीर आर्थिक झटका साबित हो सकती है।


भारत की गैस आपूर्ति पर संकट

भारत अपनी कुल आवश्यकताओं का लगभग 40 प्रतिशत एलएनजी कतर से आयात करता है। कतर में उत्पादन रुकने के कारण पेट्रोनेट एलएनजी ने प्रमुख कंपनियों गेल (GAIL) और इंडियन ऑयल को सप्लाई में रुकावट की चेतावनी दी है। इसके परिणामस्वरूप, गैस मार्केटर्स ने सीएनजी रिटेलिंग के लिए फ्लो रेट बनाए रखते हुए औद्योगिक क्षेत्रों में सप्लाई को 10 से 40 प्रतिशत तक कम कर दिया है।


सामरिक संकट का सामना

युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। भारत का लगभग 54 प्रतिशत एलएनजी और 50 प्रतिशत कच्चा तेल इसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरता है। हमलों के डर से इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है, जिससे ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं और युद्ध जोखिम वाले बीमा तथा शिपिंग लागत में भी भारी वृद्धि हो रही है।


स्पॉट मार्केट में कीमतों में वृद्धि

कतर से सप्लाई में कमी के बाद, भारतीय कंपनियों को कमी को पूरा करने के लिए 'स्पॉट मार्केट' का सहारा लेना पड़ रहा है। हालांकि, वैश्विक अस्थिरता के कारण वहां कीमतें पहले ही दोगुनी हो चुकी हैं। स्पॉट मार्केट में एलएनजी की कीमत अब 25 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट तक पहुंच गई है, जो सामान्य टर्म कॉन्ट्रैक्ट दरों से काफी अधिक है। इतनी महंगी गैस खरीदने से बिजली और खाद उत्पादन की लागत में वृद्धि होगी।


महंगाई और भविष्य की चुनौतियाँ

यदि यह तनाव अगले दस दिनों तक जारी रहा, तो उद्योगों को दी जाने वाली सप्लाई में और भी कटौती हो सकती है। पेट्रोनेट का कतर से हर साल 8.5 मिलियन टन एलएनजी खरीदने का दीर्घकालिक समझौता है, जिसे पूरा करना अब चुनौतीपूर्ण हो गया है। सरकार और पेट्रोलियम कंपनियां अब अन्य विकल्पों पर विचार कर रही हैं। लेकिन सप्लाई में इस बड़ी कमी के कारण आम आदमी के बजट पर बोझ पड़ना लगभग तय है।