भारत की तेल रिफाइनिंग क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि की उम्मीद
केंद्रीय मंत्री का बड़ा बयान
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनियों के खर्चों और परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि देश में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं और रिफाइनरियां अपने अंतिम चरण में हैं। अगले 6 से 12 महीनों में इनका पूरा होना सुनिश्चित है, जिससे भारत की तेल रिफाइनिंग क्षमता 300 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुंच जाएगी। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
पश्चिम एशिया संकट के बावजूद स्थिति स्थिर
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच भारत की स्थिति को उजागर करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस कठिन समय में भी देश में तेल की कोई कमी नहीं आई। मार्च से जून के बीच देश के किसी भी हिस्से में पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं हुई और न ही पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं।
पर्याप्त तेल भंडार
भारत के पास हर चुनौती का सामना करने के लिए 60 दिनों से अधिक का क्रूड ऑयल, डीजल और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार था, क्योंकि भारत ने विभिन्न देशों से तेल की आपूर्ति के लिए रास्ते तैयार कर लिए थे।
महंगाई का बोझ ग्राहकों पर नहीं
हरदीप सिंह पुरी ने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि 2022 से 2026 के बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में काफी वृद्धि हुई, लेकिन भारत में पेट्रोल की कीमतों में केवल 5.58% और डीजल में 6.23% की मामूली बढ़ोतरी हुई। हमारी वित्तीय व्यवस्था ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी हुई कीमतों का बोझ अपने ऊपर लिया, जिससे आम उपभोक्ताओं पर इसका असर नहीं पड़ा। उन्होंने विश्वास जताया कि 2030 तक दुनिया में 3 से 4 प्रमुख रिफाइनिंग हब होंगे, जिनमें भारत एक महत्वपूर्ण स्थान बनाएगा।
क्या पेट्रोल-डीजल के दाम घटेंगे?
तेल की कीमतों में संभावित गिरावट के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने इसके पीछे का तर्क समझाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें हाल ही में कम हुई हैं, लेकिन तेल कंपनियां अभी भी उसी कच्चे तेल को रिफाइन कर रही हैं, जिसे उन्होंने पश्चिम एशिया संकट के दौरान ऊंचे दामों पर खरीदा था।
चूंकि तेल कंपनियां दो महीने पहले ही कच्चा तेल खरीदती हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय मंदी का लाभ तुरंत नहीं दिखता। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ हफ्तों तक स्थिर रहती हैं, तो सरकार निश्चित रूप से तेल की कीमतों को कम करने पर विचार करेगी।