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भारत की नई इस्पात नीति: प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और आयात चुनौतियों का समाधान

भारत सरकार एक नई राष्ट्रीय इस्पात नीति पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना और आयात से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना है। इस नीति का मसौदा जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा, जिसमें 2047 तक के लिए एक रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक ने बताया कि छोटे इस्पात उत्पादकों को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष योजनाएँ बनाई जा रही हैं, जो कार्बन उत्सर्जन में कमी पर केंद्रित होंगी।
 

नई राष्ट्रीय इस्पात नीति का मसौदा

इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक ने मंगलवार को जानकारी दी कि सरकार उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने और आयात से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने के लिए एक नई राष्ट्रीय इस्पात नीति पर कार्य कर रही है। इस नीति का प्रारूप लगभग एक सप्ताह में सार्वजनिक किया जाएगा, और इसके लिए हितधारकों से सुझाव भी मांगे जाएंगे। पौंड्रिक ने बताया कि इस नीति के तहत भारतीय इस्पात उद्योग के लिए 2047 तक का एक रोडमैप तैयार किया जाएगा।


सीआईआई द्वारा आयोजित ‘मैन्युफैक्चरिंग कॉन्फ्लुएंस 2026’ कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यह नीति भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ बनाई जा रही है। आयात के संदर्भ में, नीति में सस्ते और घटिया आयात को रोकने के लिए उपाय शामिल किए जाएंगे, जिसमें सुरक्षा शुल्क और डंपिंग रोधी शुल्क जैसे सुरक्षा उपाय शामिल हैं।


छोटे उत्पादकों के लिए प्रोत्साहन

इस्पात सचिव ने यह भी बताया कि भारतीय इस्पात उद्योग, विशेषकर छोटे इस्पात उत्पादकों को प्रौद्योगिकी और मूल्य के मामले में प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर दिया जाएगा। 2017 में पेश की गई राष्ट्रीय इस्पात नीति का उद्देश्य 2030 तक भारत की इस्पात उत्पादन क्षमता को 30 करोड़ टन तक बढ़ाना था। हालांकि, मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए इस नीति की समीक्षा की आवश्यकता महसूस की गई।


पौंड्रिक ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल) और तकनीकी उन्नयन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां इस्पात उत्पादन क्षमता और खपत तेजी से बढ़ रही है, लेकिन कार्बन उत्सर्जन में कमी और स्थिरता जैसी चुनौतियाँ भी हैं।


विकसित भारत इस्पात योजना

उन्होंने कहा, "इसलिए हम नई नीति लेकर आ रहे हैं ताकि 2047 तक के लिए एक ठोस योजना बनाई जा सके।" इस नीति में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए विभिन्न उपायों का प्रस्ताव है। पौंड्रिक ने बताया कि ‘विकसित भारत इस्पात’ नामक एक योजना प्रस्तावित की जा रही है, जो केवल छोटे इस्पात उत्पादकों के लिए होगी।


इस योजना के तहत उन्हें उनके उत्पादन के आधार पर प्रोत्साहन दिया जाएगा, जो कार्बन उत्सर्जन में कमी पर निर्भर करेगा। कार्बन उत्सर्जन में कमी बेहतर प्रौद्योगिकी, उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल और नवीकरणीय ऊर्जा के अधिक उपयोग से संभव होगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए 5,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिसे जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है।