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भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता: वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में नई चुनौतियाँ

भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता में वृद्धि के साथ, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में संभावित खतरों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने बताया कि भारत अब चिप डिजाइन और निर्माण में अपनी क्षमताएँ विकसित कर रहा है, जिससे कुछ स्थापित देशों और कंपनियों के हित प्रभावित हो सकते हैं। सरकार का लक्ष्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में व्यापक विकास करना है, जिसमें कई नई परियोजनाएँ शामिल हैं। जानें इस क्षेत्र में भारत की महत्वाकांक्षाएँ और वैश्विक स्तर पर इसकी स्थिति।
 

भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता का विकास

(मौमिता बख्शी चटर्जी)


नई दिल्ली, 20 सितंबर - भारत की बढ़ती सेमीकंडक्टर क्षमता को कुछ वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला के हितधारक 'खतरे' के रूप में देख सकते हैं। इस संदर्भ में, भारत को संभावित साइबर हमलों, भू-राजनीतिक जोखिमों और अन्य व्यवधानों के प्रति सतर्क रहना आवश्यक है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी दी।


वैष्णव ने एक साक्षात्कार में बताया कि भारत अब सेमीकंडक्टर के डिजाइन और निर्माण दोनों क्षेत्रों में अपनी क्षमताएँ विकसित कर रहा है। इससे कुछ देशों और कंपनियों के हित प्रभावित हो सकते हैं, जो पहले से इस उद्योग में मजबूत स्थिति में हैं।


उन्होंने कहा, 'भारत को इस बदलाव से जुड़े संभावित भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रति सजग रहना चाहिए।' मंत्री ने यह भी कहा कि भारत अब एक ऐसा देश बन रहा है जो चिप का डिजाइन और निर्माण कर सकता है, जो कई स्थापित खिलाड़ियों के लिए चुनौती पेश कर सकता है।


उन्होंने सेमीकंडक्टर उद्योग को संभावित खतरों के लिए तैयार रहने की सलाह दी और कहा कि कंपनियों को साइबर हमलों और अन्य प्रकार के व्यवधानों के लिए अपनी तैयारियों को मजबूत करना चाहिए।


वैष्णव ने यह भी बताया कि कई देश भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रहे हैं और अपने उत्पादों के विकास और निर्माण के लिए भारत की ओर रुख कर रहे हैं। इसलिए, भारत को अपनी उभरती रणनीतिक स्थिति को गंभीरता से लेना चाहिए।


भारत सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को केवल चिप असेंबली और परीक्षण तक सीमित नहीं रखना चाहती। सरकार का उद्देश्य चिप डिजाइन, निर्माण, उपकरण, सामग्री, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास और कुशल मानव संसाधन सहित पूरे सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करना है।


जुलाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'सेमीकॉन 2.0' को मंजूरी दी थी, जिसके तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये के निवेश से चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर उपकरण एवं सामग्री, फैब, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।


सरकार के अनुसार, सेमीकंडक्टर योजना के पहले चरण में 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें से माइक्रोन, केन्स और सीजी सेमी जैसी पांच परियोजनाएं वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं।


सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की बढ़ती महत्वाकांक्षा हाल ही में आयोजित सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जहां कई बड़ी निवेश घोषणाएं की गईं। इनमें एप्लाइड मैटेरियल्स की 2035 तक भारत में पांच अरब अमेरिकी डॉलर निवेश की योजना, लैम रिसर्च का 10,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का धोलेरा में 363 एकड़ का वेंडर पार्क और फुजीफिल्म की 800 करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर सामग्री इकाई शामिल हैं।


भारत की यह पहल देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण भूमिका दिलाने और घरेलू तकनीकी एवं विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।