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भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति में बढ़ता विश्वास: मंत्री वैष्णव

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति में बढ़ते विश्वास और वैश्विक कंपनियों के निवेश के बारे में जानकारी दी। उन्होंने युवा स्टार्टअप्स की भूमिका और उद्योग को संभावित खतरों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत एक मजबूत सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए प्रयासरत है, जिसमें चिप निर्माण के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है।
 

भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति पर मंत्री का बयान

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को बताया कि भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति अब एक नई दिशा में बढ़ रही है, क्योंकि पांच वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर इकाइयों का उत्पादन शुरू हो चुका है और वैश्विक कंपनियों का निवेश बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में युवा नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स क्वालकॉम और इंटेल जैसी कंपनियों का निर्माण करेंगे।


मंत्री ने चेतावनी दी कि सेमीकंडक्टर उद्योग और तकनीकी स्टार्टअप्स को संभावित साइबर हमलों और अन्य खतरों के प्रति सतर्क रहना चाहिए, जो भारत की सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में बाधा डाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार-पांच वर्षों में भारत की विनिर्माण क्षमताओं के प्रति वैश्विक धारणा में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।


वैष्णव ने बताया कि अब कई वैश्विक कंपनियों के सीईओ भारत में निवेश की योजना बना रहे हैं और कई कंपनियां स्थानीय साझेदारियों के लिए तैयार हैं। एक सीईओ ने उन्हें बताया कि उनकी कंपनी ने भारत में सेमीकंडक्टर योजनाओं के लिए आवश्यक पूंजी लगाने की मंजूरी दे दी है।


उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग की स्थापना के लिए धैर्य और बारीकी से काम करना आवश्यक है। भारत की दीर्घकालिक सफलता केवल मौजूदा उत्पादों पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि नए और अलग पहचान वाले उत्पादों के विकास पर भी निर्भर करेगी।


मंत्री ने युवा नवोन्मेषकों से आग्रह किया कि वे अपनी डिजाइन क्षमताओं को प्रदर्शित करें, ताकि विनिर्माता भारतीय आपूर्ति श्रृंखला को अपनाने के लिए प्रेरित हों। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत से अगली क्वालकॉम और इंटेल जैसी कंपनियां उभरेंगी।


वैष्णव ने कहा कि भारत एक मजबूत सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए प्रयासरत है, जिसमें चिप विनिर्माण के अलावा उपकरण, सामग्री, पैकेजिंग और डिजाइन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।


‘सेमीकॉन 2.0’ नीति के तहत भारत चिप डिजाइन से लेकर विनिर्माण, परीक्षण और प्रतिभा विकास तक पूरी सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला तैयार करने के लिए बड़े पूंजीगत प्रोत्साहन का लाभ उठा रहा है।


सरकार के अनुसार, ‘सेमीकॉन 2.0’ के तहत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में लगभग 11-12 अरब डॉलर के निवेश में रुचि दिखाई दी है। इस रुचि का प्रदर्शन ‘सेमीकॉन इंडिया’ कार्यक्रम में भी हुआ।


इस कार्यक्रम में भारत की चिप विनिर्माण क्षमता को प्रदर्शित किया गया और कई बड़े निवेश प्रस्तावों की घोषणा की गई। वैष्णव ने कहा कि ‘सेमीकॉन 2.0’ के लक्ष्यों में वैश्विक उपकरण विनिर्माता कंपनियों को भारत में अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रेरित करना शामिल है।


उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 200 चिप-डिजाइन स्टार्टअप्स को उद्यम पूंजी दिलाने, एक लाख कुशल तकनीशियनों को प्रशिक्षित करने और एक लाख से अधिक रोजगार पैदा करने का है।


वैष्णव ने ‘सेमीकॉन इंडिया’ में वैश्विक भागीदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम में सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला से जुड़ी लगभग 600 कंपनियों ने भाग लिया।


मंत्री ने कहा कि भारत में उत्पादन कर रही पांच सेमीकंडक्टर इकाइयां वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हैं और प्रमुख बाजारों को निर्यात कर रही हैं।


उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार लागत और गुणवत्ता वाले चिप का निर्माण कर सकता है।


मंत्री ने उद्योग को संभावित भू-राजनीतिक बाधाओं और साइबर खतरों के प्रति सतर्क रहने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि उद्योग को इन जोखिमों के प्रति सजग रहना चाहिए और उचित कदम उठाने चाहिए।