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भारत की सेमीकॉन 2.0 योजना: चिप विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर कदम

भारत सरकार ने सेमीकॉन 2.0 योजना की अधिसूचना जारी की है, जो 1,27,500 करोड़ रुपये के निवेश के साथ चिप विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखती है। इस योजना का उद्देश्य स्वदेशी डिज़ाइन, बौद्धिक संपदा, और अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करना है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग के चलते, सेमीकंडक्टर की मांग में वृद्धि हुई है, जिससे वैश्विक कंपनियों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया है। योजना में स्टार्टअप और विदेशी नागरिकों के स्वामित्व वाली कंपनियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
 

सेमीकॉन 2.0 योजना का शुभारंभ

भारत सरकार ने सोमवार को सेमीकॉन 2.0 योजना की अधिसूचना जारी की, जिससे 1,27,500 करोड़ रुपये की इस योजना के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य चिप निर्माण के साथ-साथ स्वदेशी डिज़ाइन, बौद्धिक संपदा (आईपी), उपकरण, सामग्री, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) और प्रतिभा विकास के लिए एक समग्र सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।


वैश्विक सेमीकंडक्टर परिदृश्य

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब सेमीकंडक्टर वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संसाधन बन चुके हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग के कारण उन्नत चिप्स और मेमोरी की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों और बदलती भू-राजनीतिक स्थितियों ने वैश्विक कंपनियों को सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता को बढ़ाने और कुछ सीमित उत्पादन केंद्रों पर निर्भरता को कम करने के लिए प्रेरित किया है।


योजना की विशेषताएँ

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 जुलाई, 2026 को सेमीकॉन 2.0 योजना को मंजूरी दी थी। हाल ही में जारी अधिसूचना में योजना के कार्यान्वयन के तरीके, प्रोत्साहनों की संरचना और विभिन्न श्रेणियों के लिए पात्रता मानदंड का विवरण दिया गया है। आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि अब सेमीकॉन 2.0 के माध्यम से सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के अगले चरण में जाने का समय आ गया है।


स्टार्टअप और कंपनियों के लिए अवसर

चिप डिज़ाइन के क्षेत्र में स्टार्टअप और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) के स्वामित्व वाली कंपनियां इस योजना के तहत पात्र होंगी। स्टार्टअप को वित्तीय सहायता अनुदान और शेयर सह-निवेश के रूप में प्रदान की जाएगी। कंपनियों को रॉयल्टी वित्तपोषण या शेयर सह-निवेश के माध्यम से सहायता मिलेगी।


वित्तीय सहायता की संरचना

नई योजना के तहत अधिक सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों (फैब) की स्थापना के लिए 'सिलिकॉन फैब' के लिए 40 प्रतिशत और कंपाउंड, डिस्प्ले (एलसीडी, ओएलईडी, माइक्रो एलईडी) तथा अन्य विशेष विनिर्माण इकाइयों के लिए 35 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, उन्नत और पारंपरिक पैकेजिंग को समर्थन देने के लिए पूंजीगत व्यय का 35 प्रतिशत और 25 प्रतिशत प्रोत्साहन दिया जाएगा।


पहले चरण की उपलब्धियाँ

इस कार्यक्रम के पहले चरण में, सरकार ने छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। इनमें माइक्रॉन की एटीएमपी इकाई, कायन्स सेमीकॉन और सीजी सेमी की ओएसएटी इकाई शामिल हैं, जिन्होंने इस वर्ष की शुरुआत में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया है।