भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में वृद्धि, लेकिन आयात पर निर्भरता बनी हुई है
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निर्यात और आयात का संतुलन
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में हालिया वृद्धि के बावजूद, एक महत्वपूर्ण चुनौती सामने आई है। जुलाई में, देश ने इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात 57.4 प्रतिशत बढ़ाकर 5.92 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया। हालांकि, इसी अवधि में आयात भी 46.03 प्रतिशत बढ़कर 14.37 अरब डॉलर हो गया। इसका मतलब है कि भारत ने हर 100 डॉलर के निर्यात के मुकाबले लगभग 243 डॉलर का आयात किया।
वित्तीय वर्ष की शुरुआत में निर्यात और आयात की स्थिति
वर्तमान वित्तीय वर्ष के पहले चार महीनों में भी यही स्थिति बनी रही। अप्रैल से जुलाई के बीच, इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात 30.7 प्रतिशत बढ़कर 21.11 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 44.4 प्रतिशत बढ़कर 52.82 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस प्रकार, इस क्षेत्र में लगभग 31.7 अरब डॉलर का व्यापार घाटा देखा गया।
निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियाँ
ये आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और निर्यात में तेजी से प्रगति कर रहा है, लेकिन इसके लिए अभी भी विदेशी कल-पुर्जों, मशीनों और तैयार उत्पादों पर निर्भरता बनी हुई है। मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उत्पादन में वृद्धि के बावजूद, स्थानीय स्तर पर पूरी आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की चुनौती बनी हुई है।
कुल वस्तु निर्यात में वृद्धि
इस दौरान, भारत का कुल वस्तु निर्यात भी मजबूत रहा। जुलाई में कुल निर्यात सालाना आधार पर 19.6 प्रतिशत बढ़कर 44.24 अरब डॉलर हो गया। वहीं, आयात 17.5 प्रतिशत बढ़कर 76.22 अरब डॉलर रहा। अप्रैल से जुलाई के बीच निर्यात 17 प्रतिशत बढ़कर 173.78 अरब डॉलर और आयात 19.3 प्रतिशत बढ़कर 292.38 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
कच्चे तेल का आयात और उसके प्रभाव
आयात बिल पर कच्चे तेल का प्रभाव भी लगातार बना हुआ है। जुलाई में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात 17.6 प्रतिशत बढ़कर 18.31 अरब डॉलर हो गया। अप्रैल से जुलाई के दौरान यह 21.8 प्रतिशत बढ़कर 78.92 अरब डॉलर तक पहुंच गया। दूसरी ओर, पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात जुलाई में 67.6 प्रतिशत बढ़कर 6.92 अरब डॉलर हो गया।
विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि
विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े सामान के निर्यात में वृद्धि के प्रमुख कारण रहे हैं। इंजीनियरिंग सामान का निर्यात जुलाई में 17.7 प्रतिशत बढ़कर 12.24 अरब डॉलर और अप्रैल-जुलाई में 18.2 प्रतिशत बढ़कर 46.38 अरब डॉलर रहा। इलेक्ट्रॉनिक सामान बड़ी श्रेणियों में सबसे तेज बढ़ने वाला क्षेत्र रहा है।
कच्चे माल और मशीनों की बढ़ती मांग
हालांकि, उत्पादन में वृद्धि के साथ कच्चे माल और मशीनों की आवश्यकता भी बढ़ रही है। जुलाई में मशीनरी और विद्युत तथा गैर-विद्युत उपकरणों का आयात 13.8 प्रतिशत बढ़कर 6.09 अरब डॉलर हो गया। अलौह धातुओं का आयात 19.8 प्रतिशत बढ़कर 2.93 अरब डॉलर और उर्वरक का आयात 55.4 प्रतिशत बढ़कर 2.48 अरब डॉलर रहा।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता
भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता का असर ताइवान और चीन के आंकड़ों में भी दिखाई देता है। जुलाई में ताइवान से आयात 111.3 प्रतिशत बढ़कर 1.62 अरब डॉलर हो गया। चीन से आयात 34.4 प्रतिशत बढ़कर 14.67 अरब डॉलर रहा। चीन को भारत का निर्यात भी 64.6 प्रतिशत बढ़कर 2.20 अरब डॉलर हुआ, लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार अंतर अभी भी काफी बड़ा है।
अमेरिका के साथ व्यापार संतुलन
अमेरिका के साथ भारत का व्यापार संतुलन अपेक्षाकृत बेहतर रहा। जुलाई में अमेरिका को निर्यात 12.9 प्रतिशत बढ़कर 9.02 अरब डॉलर और वहां से आयात 18.1 प्रतिशत बढ़कर 5.47 अरब डॉलर रहा। इसका मतलब है कि अमेरिका के साथ भारत को वस्तु व्यापार में अधिशेष मिला है।
पारंपरिक निर्यात क्षेत्रों में कमजोरी
दूसरी ओर, चाय, तंबाकू, मसाले और कपड़ा जैसे पारंपरिक निर्यात क्षेत्रों में कमजोरी देखी गई है। जुलाई में चाय निर्यात 14.8 प्रतिशत और तैयार कपड़ों का निर्यात 4.5 प्रतिशत घटा। चमड़ा, जूट उत्पाद और तंबाकू के निर्यात में भी गिरावट आई है।
निर्यात में वृद्धि के सकारात्मक संकेत
हालांकि, मांस, डेयरी और मुर्गी उत्पादों का निर्यात जुलाई में 40.8 प्रतिशत बढ़ा। समुद्री उत्पादों में 17.8 प्रतिशत और लौह अयस्क में 78.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कुल मिलाकर, भारत का निर्यात तेजी से विनिर्माण की दिशा में बढ़ रहा है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स सहित कई क्षेत्रों में आयातित सामान और कल-पुर्जों पर निर्भरता कम करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।