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भारत के औद्योगिक क्षेत्र में एआई का महत्व: नई रिपोर्ट से खुलासा

पीडब्ल्यूसी इंडिया की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के औद्योगिक विनिर्माण क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, 59 प्रतिशत औद्योगिक निर्माताओं का मानना है कि एआई अगले पांच वर्षों में रणनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा। इसके अलावा, एआई के प्रभावी कार्यान्वयन से दीर्घकालिक मूल्य सृजन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। जानें इस रिपोर्ट में और क्या कहा गया है और कैसे एआई भारतीय उद्योग को आगे बढ़ा सकता है।
 

भारत के औद्योगिक विनिर्माण में एआई की भूमिका

भारत के औद्योगिक विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को अपने व्यापारिक रणनीतियों, संचालन मॉडल और दैनिक कार्यों में कितनी प्रभावी ढंग से शामिल करती हैं। यह जानकारी पीडब्ल्यूसी इंडिया द्वारा बुधवार को जारी की गई एक रिपोर्ट में दी गई है।


रिपोर्ट, जिसका शीर्षक है 'रीराइटिंग द रूल्स: द नेक्स्ट चैप्टर ऑफ इंडियन इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग', के अनुसार, भारत के 59 प्रतिशत औद्योगिक निर्माताओं का मानना है कि अगले पांच वर्षों में एआई रणनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 52 प्रतिशत है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि लगभग 60 प्रतिशत भारतीय औद्योगिक निर्माता एआई को अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण मानते हैं। इसके अलावा, 71 प्रतिशत का मानना है कि विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग से नए विकास के अवसर उत्पन्न होंगे।


रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई आधारित भविष्य में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ केवल इस बात पर निर्भर नहीं करेगा कि संगठन कौन-सी तकनीक अपनाते हैं, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वे इसे अपनी व्यापारिक रणनीति, संचालन मॉडल और दैनिक कार्यों में कितनी सहजता से शामिल करते हैं।


हालांकि एआई को लेकर महत्वाकांक्षाएं व्यापक हैं, असली चुनौती और दीर्घकालिक मूल्य सृजन की कुंजी इसके प्रभावी कार्यान्वयन में निहित है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय निर्माता अगले पांच वर्षों में पूरी मूल्य श्रृंखला में स्वचालन की गति को भी बढ़ा रहे हैं।


डेटा संग्रहण और विश्लेषण (82 प्रतिशत) इस प्रक्रिया में सबसे आगे है, इसके बाद गुणवत्ता आश्वासन (69 प्रतिशत), योजना और पूर्वानुमान (65 प्रतिशत) तथा ग्राहकों के साथ संवाद (63 प्रतिशत) का स्थान है।


पीडब्ल्यूसी इंडिया के साझेदार और विनिर्माण क्षेत्र के प्रमुख विनोद कुमार ने कहा कि भारत के विनिर्माण क्षेत्र के लिए अवसर अब केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं।


यह एआई, स्वचालन और डेटा-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया का उपयोग कर ऐसे बुद्धिमान उद्यम विकसित करने का है जो टिकाऊ प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करें। उन्होंने कहा, 'वे निर्माता सफल होंगे जो प्रौद्योगिकी में निवेश को व्यापारिक रणनीति, कार्यबल में बदलाव और विभिन्न हितधारकों के साथ सहयोग के अनुरूप ढालेंगे।'