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भारत के प्रमुख शहरों में शॉपिंग मॉल में खुदरा दुकानों की आपूर्ति में भारी गिरावट

भारत के प्रमुख शहरों में शॉपिंग मॉल में खुदरा दुकानों की नई आपूर्ति में 57% की कमी आई है। एनारॉक की रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण गतिविधियों में देरी और भूमि की बढ़ती कीमतें इसके मुख्य कारण हैं। प्रमुख शहरों में उपयुक्त भूमि की कमी और स्वीकृति प्रक्रियाएं भी इस समस्या को बढ़ा रही हैं। जानें इस स्थिति का खुदरा बाजार पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
 

खुदरा दुकानों की नई आपूर्ति में कमी

नई दिल्ली, 27 जुलाई - निर्माण कार्यों में देरी के चलते, देश के सात बड़े शहरों में जनवरी से जून 2023 के बीच शॉपिंग मॉल में खुदरा दुकानों की नई आपूर्ति 57 प्रतिशत घटकर केवल नौ लाख वर्ग फुट रह गई है। यह जानकारी सोमवार को एक रिपोर्ट में सामने आई। रियल एस्टेट सलाहकार एनारॉक के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली छमाही में मॉल में खुदरा दुकानों का कुल पट्टा लगभग 41 लाख वर्ग फुट रहा, जबकि नई आपूर्ति मात्र नौ लाख वर्ग फुट थी।


इस अध्ययन में शामिल प्रमुख शहरों में मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता शामिल हैं। एनारॉक ग्रुप के सीईओ अनुज केजरीवाल ने कहा, “आपूर्ति की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले 16 वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि ग्रेड-ए खुदरा स्थलों की आपूर्ति और किराए की मांग के बीच असंतुलन बना हुआ है।”


उन्होंने आगे कहा, “वर्तमान स्थिति यह है कि आपूर्ति के मामले में बाजार बेहद सीमित हो गया है, और खुदरा कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ग्राहकों को आकर्षित करना नहीं, बल्कि उपयुक्त स्थान प्राप्त करना है।” एनारॉक ने यह भी बताया कि ग्रेड-ए मॉल की कमी का मुख्य कारण यह है कि बड़ी और सफल खुदरा परियोजनाएं अन्य रियल एस्टेट परियोजनाओं की तुलना में अधिक जटिल होती हैं।


इसके लिए रणनीतिक स्थान पर बड़े और एकीकृत भूखंड की आवश्यकता होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रमुख शहरों में शॉपिंग मॉल के लिए उपयुक्त भूमि की उपलब्धता सीमित है, और भूमि की बढ़ती कीमतें नई परियोजनाओं को स्थापित करने में कठिनाई पैदा कर रही हैं। इसके अलावा, स्वीकृति प्रक्रियाएं, वित्तीय हालात और निर्माण समय-सीमा भी परियोजनाओं में देरी का कारण बनते हैं।


एनारॉक के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली छमाही में मॉल में खाली दुकानों की दर घटकर 6.7 प्रतिशत रह गई है।