भारत के मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में नई चुनौतियाँ और अवसर
मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र की वृद्धि के लिए आवश्यकताएँ
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि मीडिया और मनोरंजन उद्योग की अगली वृद्धि के लिए मजबूत बौद्धिक संपदा, टिकाऊ राजस्व मॉडल, सोच-समझकर निवेश और विभिन्न बाजारों के दर्शकों तक पहुंच बनाना आवश्यक है। उन्होंने ‘सीआईआई बिग पिक्चर समिट’ के 13वें संस्करण में अपने विचार साझा करते हुए कहा कि सरकार का कर्तव्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जिसमें रचनात्मक व्यवसाय का विकास हो सके।
कुमार ने कहा, ‘‘उद्यमी, क्रिएटर, स्टूडियो और निवेशक कंपनियों का निर्माण करेंगे। हमारी जिम्मेदारी उनके चारों ओर के तंत्र को मजबूत करने में सहायता करना है।’’ उन्होंने यह भी बताया कि वैश्विक स्तर पर मीडिया कंपनियाँ अपने कारोबारी मॉडल की समीक्षा कर रही हैं, और इन परिवर्तनों को टिकाऊ अवसरों में बदलना एक बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा, ‘‘डिजिटल प्लेटफार्म दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, पारंपरिक व्यवसाय उपभोग के नए तरीकों के अनुसार ढल रहे हैं, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उत्पादन की प्रक्रिया, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार सामग्री निर्माण और वितरण को बदल रही है।’’
कुमार ने भारत की ‘‘विशिष्ट ताकतों’’ का उल्लेख किया, जिसमें विशाल घरेलू बाजार, कहानी कहने की सांस्कृतिक परंपरा, सांस्कृतिक विविधता, युवा रचनात्मक कार्यबल और विभिन्न प्रारूपों और कीमतों पर दर्शकों तक पहुंचने की क्षमता शामिल है।
उन्होंने बताया कि भारत का मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र 2025 तक 9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच जाएगा। इस दौरान डिजिटल मीडिया का राजस्व एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। सचिव ने कहा कि इसी अवधि में ‘लाइव’ कार्यक्रमों के कारोबार में 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
कुमार के अनुसार, ये आंकड़े मनोरंजन के उपभोग और उससे कमाई करने के तरीकों में बुनियादी बदलाव को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मनोरंजन का अर्थशास्त्र बुनियादी तौर पर बदल रहा है। सामग्री का वितरण अब केवल टेलीविजन नेटवर्क, सिनेमा घरों या स्थापित स्टूडियो तक सीमित नहीं है।’’
कुमार ने यह भी बताया कि दर्शक अक्सर एक ही दिन में फिल्में देखते हैं, स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म पर सामग्री का आनंद लेते हैं, क्रिएटर की सामग्री से जुड़ते हैं, गेमिंग करते हैं, लाइव कार्यक्रमों में भाग लेते हैं और इंटरनेट से जुड़े टेलीविजन पर भी सामग्री देखते हैं।