भारत के वस्तु निर्यात में जून में 15.5% की वृद्धि, रिपोर्ट में खुलासा
भारत के वस्तु निर्यात में वृद्धि
नई दिल्ली: भारत के वस्तु निर्यात में जून में सालाना आधार पर 15.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, मासिक तुलना में इसमें थोड़ी कमी आई है। यह जानकारी शुक्रवार को एक रिपोर्ट में साझा की गई।
क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, मई में वस्तु निर्यात की वृद्धि दर 18 प्रतिशत थी। इस दौरान पेट्रोलियम निर्यात में कमी आने से वस्तु व्यापार घाटा बढ़ा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जून में कृषि निर्यात का प्रदर्शन मजबूत रहा, जिसका मुख्य कारण अनुकूल आधार प्रभाव था।
सालाना आधार पर चावल का निर्यात 16.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात 54.6 प्रतिशत और समुद्री उत्पादों का निर्यात 14.5 प्रतिशत बढ़ा। 'अन्य अनाज' श्रेणी में निर्यात में 244.2 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
जून में रत्न एवं आभूषण निर्यात में 34.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि मुख्य निर्यात में 15.3 प्रतिशत की वृद्धि ने पेट्रोलियम निर्यात में आई कमी की आंशिक भरपाई की।
मुख्य निर्यात में वृद्धि का नेतृत्व ऑर्गेनिक एवं इनऑर्गेनिक केमिकल (19.4 प्रतिशत), इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं (18.9 प्रतिशत) और फार्मास्यूटिकल्स (7.1 प्रतिशत) ने किया।
हालांकि, इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात की वृद्धि दर घटकर 20.7 प्रतिशत रह गई, लेकिन यह अभी भी एक मजबूत स्तर पर बनी हुई है।
ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में अंतरिम शांति समझौते के बाद आई गिरावट के कारण जून में पेट्रोलियम निर्यात घटकर 4.9 अरब डॉलर रह गया, जो मई में 8.4 अरब डॉलर था।
जून में ब्रेंट कच्चे तेल की औसत कीमत 85.4 डॉलर प्रति बैरल रही, जो पहले के 107.1 डॉलर प्रति बैरल की तुलना में 20.3 प्रतिशत कम है।
रिपोर्ट के अनुसार, जून में वस्तु आयात 31 प्रतिशत बढ़कर 70.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जिसका मुख्य कारण मुख्य आयात में तेज वृद्धि और तेल तथा सोने की अधिक खरीद है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 में चालू खाते का घाटा (सीएडी) जीडीपी के 1.5 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह 0.6 प्रतिशत था।
रिपोर्ट में वस्तु व्यापार घाटे का मुख्य कारण तेल को बताया गया है और चेतावनी दी गई है कि कच्चे तेल एवं अन्य जिंसों की ऊंची कीमतें चालू खाते के घाटे पर दबाव डालेंगी।
रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि अगले एक वर्ष में कच्चे तेल की औसत कीमत 82-87 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकती है, लेकिन पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक जोखिमों को इस अनुमान के लिए एक प्रमुख अनिश्चितता बताया गया है।