भारत के विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक व्यापार में मजबूती देने के लिए एफटीए का लाभ उठाने की आवश्यकता
सरकार का उद्योग जगत को संदेश
यशवीर सिंह, जो वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव हैं, ने बृहस्पतिवार को बताया कि सरकार ने उद्योगों से विनिर्माण को बढ़ावा देने और वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि मूल्यवर्धन, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण और निर्यात बाजारों में विविधता लाना आवश्यक है।
सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत द्वारा किए गए व्यापार समझौतों को एक दरवाजे के रूप में देखा जाना चाहिए, जो उद्योग जगत को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
उद्योगों को बाजार पहुंच बढ़ाने, निवेश और प्रौद्योगिकी को आकर्षित करने, और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने के लिए एफटीए का उपयोग करना चाहिए।
विनिर्माण सम्मेलन में महत्वपूर्ण सुझाव
एक विनिर्माण सम्मेलन में, अतिरिक्त सचिव ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल वैश्विक विनिर्माण में भागीदारी नहीं है, बल्कि इसे वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी भागीदार बनाना है।
उन्होंने पांच महत्वपूर्ण बिंदुओं को साझा किया, जो रणनीतिक दायित्व हैं। पहले, एफटीए के उपयोग में निवेश करना चाहिए और मूल स्थान संबंधी नियमों को समझना चाहिए।
सिंह ने बताया कि भारत के निर्यात में पूंजीगत वस्तुओं की हिस्सेदारी 2014 में 13 प्रतिशत से बढ़कर अब 19 प्रतिशत हो गई है, लेकिन इसे और तेज करना होगा।
आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की आवश्यकता
उन्होंने कहा कि चीन पर निर्भरता एक जोखिम है, लेकिन यह भारत के लिए एक अवसर भी है। महत्वपूर्ण खनिजों और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों में निवेश करने की आवश्यकता है।
सिंह ने ओमान, न्यूजीलैंड और मॉरीशस के साथ व्यापार समझौतों का उल्लेख किया, जो नए बाजारों के दरवाजे खोलते हैं।
उन्होंने मानकों के निर्धारण में भाग लेने का भी सुझाव दिया, क्योंकि जो देश मानकों को निर्धारित करता है, वही बाजार पर नियंत्रण रखता है।
भारत को एक भरोसेमंद भागीदार बनना होगा
सिंह ने कहा कि उद्योग को चीन प्लस वन की बजाय एक मजबूत और विश्वसनीय भागीदार बनना चाहिए।
उन्होंने वैश्विक अनिश्चितताओं का जिक्र करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों पर प्रतिबंधों का उपयोग किया जा रहा है और व्यापार अब केवल आर्थिक साधन नहीं रह गया है।
यह भौगोलिक-राजनीतिक रणनीति का एक साधन बन गया है, जिसके परिणामस्वरूप विनिर्माण और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाएं एक जगह केंद्रित हो रही हैं।