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भारत के व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि: नए बाजारों की खोज

भारत ने पिछले एक वर्ष में अपनी व्यापार नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे नए बाजारों की खोज और व्यापार समझौतों के माध्यम से व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच, भारत कनाडा, इस्राइल, और अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों पर तेजी से काम कर रहा है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कुल व्यापार 2024 में 28.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है। जानें इस वृद्धि के पीछे के कारण और भारत के प्रमुख निर्यात गंतव्यों के बारे में।
 

भारत की व्यापार नीति में बदलाव


पिछले एक वर्ष में भारत ने व्यापार नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, नए बाजारों की खोज और व्यापार समझौतों के माध्यम से व्यापार में वृद्धि की है।


पिछले साल अमेरिका द्वारा लागू किए गए नए टैरिफ नियमों के बाद, भारत ने अपनी व्यापार नीति में तेजी से बदलाव किया। इसके तहत, भारत ने कई वर्षों से लंबित व्यापार समझौतों पर तेजी से बातचीत की और नए आयात-निर्यात बाजारों की खोज की। इस बदलाव से भारत की एकल देश पर निर्भरता कम हुई है और व्यापार में तेजी आई है। वर्तमान में, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के कारण एक बार फिर से चुनौतीपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई है।


भारत का ध्यान नए विदेशी बाजारों पर

ईरान संकट के बीच, भारत नए बाजारों में प्रवेश करने की योजना बना रहा है। इसके लिए कनाडा, इस्राइल, श्रीलंका, पेरू, चिली, ऑस्ट्रेलिया और मेक्सिको के साथ मुक्त व्यापार समझौतों पर तेजी से काम चल रहा है। फिलीपींस और मालदीव के साथ भी बातचीत आगे बढ़ाई जाएगी। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी अमेरिका (विशेषकर अमेरिका) और यूरोप (नीदरलैंड्स के नेतृत्व में) जैसे पारंपरिक बाजार निर्यात के प्रमुख आधार बने हुए हैं। उत्तर-पूर्व एशिया और पूर्वी अफ्रीका जैसे उभरते क्षेत्र भी महत्व प्राप्त कर रहे हैं, जो विविधीकरण की दिशा में संकेत देते हैं।


भारत का कुल व्यापार कैसे बढ़ा

मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से, भारत का कुल व्यापार 2024 में 28.8 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो 2006 में केवल 4.6 प्रतिशत था। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के लागू होने के बाद यह हिस्सेदारी और बढ़ने की उम्मीद है। भारत के कुल निर्यात-आयात में खाड़ी क्षेत्र का लगभग 12 प्रतिशत योगदान है, जिसमें यूएई (निर्यात 7.5 प्रतिशत और आयात 6.1 प्रतिशत) और सऊदी अरब (निर्यात 2.36 प्रतिशत और आयात 3.9 प्रतिशत) प्रमुख साझेदार हैं। यूएई एक महत्वपूर्ण पुन: निर्यात केंद्र के रूप में कार्य करता है, जो भारत के व्यापार को पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप से जोड़ता है।


भारत के प्रमुख निर्यात गंतव्य

भारत के कुल निर्यात में अमेरिका, यूएई और हांगकांग की संयुक्त हिस्सेदारी 70-75 प्रतिशत है। इसके अलावा, स्पेन भारत के शीर्ष-10 निर्यात गंतव्यों में शामिल हो गया है। उत्तर-पूर्व एशिया में निर्यात में 33.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि खाड़ी क्षेत्र में प्रमुख ऊर्जा ढांचों पर मिसाइल हमलों ने आपूर्ति में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। वैश्विक स्तर पर परिवहन और उत्पादन लागत भी बढ़ रही है।