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भारत के संस्थापकों की यूनिकॉर्न कंपनियों का मूल्यांकन 560 अरब डॉलर

भारत में पले-बढ़े संस्थापकों से जुड़ी यूनिकॉर्न कंपनियों का अनुमानित मूल्य 560 अरब डॉलर है, जैसा कि प्रोसस और डीलरूम के नए सूचकांक में बताया गया है। इस रिपोर्ट में भारत में स्थित 102 यूनिकॉर्न कंपनियों का मूल्यांकन 349 अरब डॉलर है। जानें किस प्रकार भारतीय संस्थापक तकनीक और प्रतिभा का उपयोग कर व्यवसायों को विकसित कर रहे हैं और अमेरिका में स्थित कंपनियों का क्या स्थान है।
 

भारत में यूनिकॉर्न कंपनियों का मूल्यांकन

(अर्थ 78 के शीर्षक एवं खबर में आंकड़े संशोधित करते हुए... सूचकांक प्रदाताओं की तरफ से किए गए संशोधन के बाद)


नई दिल्ली, 21 सितंबर: भारत में पले-बढ़े संस्थापकों से संबंधित वर्तमान और पूर्व यूनिकॉर्न कंपनियों का अनुमानित मूल्य 560 अरब डॉलर है। यह जानकारी प्रोसस और डीलरूम द्वारा जारी किए गए नए ‘इंडियन डायस्पोरा सूचकांक’ में दी गई है।


रिपोर्ट के अनुसार, यह 560 अरब डॉलर का आंकड़ा संस्थापकों की वास्तविक हिस्सेदारी पर आधारित नहीं है, बल्कि यह एक अनुमानित पद्धति से निकाला गया है। इस पद्धति में प्रत्येक कंपनी के मूल्यांकन को उसके संस्थापकों की संख्या के बीच समान रूप से बांटा गया और भारत में पले-बढ़े संस्थापकों के हिस्से में आने वाले मूल्य को जोड़ा गया, चाहे उनकी वास्तविक हिस्सेदारी कितनी भी हो।


एक अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाली स्टार्टअप कंपनियों को यूनिकॉर्न कहा जाता है।


रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में स्थित 102 यूनिकॉर्न कंपनियों का अनुमानित मूल्य लगभग 349 अरब डॉलर है। इनमें फ्लिपकार्ट 36 अरब डॉलर, जोमैटो 30 अरब डॉलर और ग्रो 16 अरब डॉलर के साथ प्रमुख हैं।


रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुल 243 अरब डॉलर मूल्यांकन वाली 70 यूनिकॉर्न कंपनियां पूरी तरह से भारतीय संस्थापकों द्वारा स्थापित की गई हैं। इनमें जेडस्केलर के जय चौधरी, रुब्रिक के अरविंद जैन, अरविंद निथ्रकश्यप, बिपुल सिन्हा और सोहम मजूमदार, न्यूटैनिक्स के अजीत सिंह, धीरज पांडेय और मोहित एरन तथा स्किल्ड के दीपक पाठक और अभिनव गुप्ता शामिल हैं।


इसके अतिरिक्त, 135 यूनिकॉर्न कंपनियों में भारतीय मूल के संस्थापक प्रमुख टीम का हिस्सा हैं। इनमें पालो ऑल्टो, ब्लूम एनर्जी, एस्टेरा लैब्स और पर्प्लेक्सिटी शामिल हैं। इन कंपनियों का अनुमानित मूल्य 317 अरब डॉलर है।


प्रोसस इंडिया के प्रमुख निवेशक सौरव जैन ने कहा कि भारतीय संस्थापक प्रौद्योगिकी, प्रतिभा और स्थानीय समझ को ऐसे कारोबार में बदलने में सक्षम हैं, जो लोगों के जीवन और कार्य करने के तरीके को बदल सकते हैं।


जैन ने कहा, “इंडियन डायस्पोरा सूचकांक उस चीज को मापता है, जिसे हमने भारत में खुद देखा और अनुभव किया है। यहां असाधारण प्रतिभाओं की बड़ी संख्या है और बड़े पैमाने पर कारोबार खड़ा करने की महत्वाकांक्षा भी है। इनमें से कई प्रतिभाएं देश की कुछ सबसे जटिल और महत्वपूर्ण समस्याओं का समाधान करने पर काम कर रही हैं। यही वजह है कि हम करीब दो दशक से भारत में निवेश कर रहे हैं।”


रिपोर्ट के अनुसार, जन्मस्थान के आधार पर किए गए एक अलग और व्यापक विश्लेषण में शामिल कंपनियों में 62 प्रतिशत अमेरिका में स्थित हैं। इस विश्लेषण में 323 कंपनियों को शामिल किया गया है। इनमें से 178 कंपनियां अमेरिका में शुरू हुईं, जबकि 22 कंपनियां बाद में अमेरिका स्थानांतरित हो गईं।


इस विश्लेषण में बचपन में भारत से बाहर चले गए संस्थापकों के साथ भारत में स्थित कंपनियों को भी शामिल किया गया है। यह विश्लेषण भारत में पले-बढ़े संस्थापकों वाली विदेश स्थित यूनिकॉर्न के संकरे दायरे वाले सूचकांक से अलग है।