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भारत ने अमेरिकी सीनेट में रूसी तेल पर शुल्क विधेयक पर अपनी स्थिति स्पष्ट की

भारत ने अमेरिकी सीनेट द्वारा रूसी तेल और गैस पर शुल्क लगाने वाले विधेयक पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर भारत अमेरिका के साथ संवाद बनाए रखेगा। विधेयक में उन देशों को लक्षित किया गया है जो रूस से बड़े पैमाने पर ऊर्जा का आयात करते हैं, जिसमें भारत और चीन शामिल हैं। जानें इस विधेयक के पीछे के कारण और भारत की प्रतिक्रिया के बारे में।
 

भारत की प्रतिक्रिया

अमेरिकी सीनेट द्वारा रूसी तेल और गैस पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने वाले विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद, भारत ने शुक्रवार को कहा कि वह इस स्थिति पर ध्यान दे रहा है। इस विधेयक को अब प्रतिनिधि सभा में विचार के लिए भेजा जाएगा। प्रस्तावित कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर कड़े व्यापारिक शुल्क लगाने का अधिकार देगा, जो रूस से बड़े पैमाने पर ऊर्जा का आयात करते हैं।


विदेश मंत्रालय की टिप्पणी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत की ऊर्जा सुरक्षा के प्रति दृष्टिकोण पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है। यह हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा आवश्यकताओं को विभिन्न स्रोतों से पूरा करने पर आधारित है, जिसमें अमेरिका भी शामिल है।” उन्होंने यह भी बताया कि भारत इस मुद्दे पर अमेरिका के विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद बनाए रखे हुए है।


विधेयक की विशेषताएँ

सीनेटर लिंडसे ओ ग्राहम द्वारा प्रस्तुत इस विधेयक में रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस का समर्थन करने वाले तत्वों पर प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। इसमें रूसी अधिकारियों, उद्योगपतियों, उनके परिवारों, बैंकों और रूसी शैडो फ्लीट को निशाना बनाया गया है। विधेयक की धारा 113 के तहत उन पांच देशों को विशेष रूप से लक्षित किया गया है, जो रूसी ईंधन के सबसे बड़े खरीदार हैं या प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। इनमें भारत और चीन के साथ-साथ स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं।


आयात व्यवहार की समीक्षा

प्रस्ताव के अनुसार, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) हर 180 दिन में इन देशों की सूची की समीक्षा करेगा और उनके आयात व्यवहार के आधार पर शुल्क दरों में बदलाव किया जा सकता है।