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भारत ने फिर से हासिल किया दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार का स्थान

भारत ने वैश्विक शेयर बाजारों में फिर से पांचवां स्थान हासिल किया है, जो ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में गिरावट के कारण संभव हुआ। वर्तमान में भारत का बाजार पूंजीकरण 5.05 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की भागीदारी से भारतीय बाजार को मजबूती मिल रही है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और भविष्य की संभावनाएं।
 

भारत का बाजार पूंजीकरण बढ़ा

वैश्विक शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत के लिए एक सकारात्मक समाचार आया है। बाजार पूंजीकरण के आधार पर, भारत ने एक बार फिर से दुनिया के पांचवें सबसे बड़े शेयर बाजार का दर्जा प्राप्त कर लिया है। पहले भारत सातवें स्थान पर था, लेकिन ताइवान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में आई गिरावट के चलते भारत ने फिर से शीर्ष पांच में अपनी जगह बनाई है।


बाजार पूंजीकरण की स्थिति

वर्तमान में, भारत का कुल बाजार पूंजीकरण लगभग 5.05 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं, ताइवान का बाजार पूंजीकरण घटकर 4.97 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर और दक्षिण कोरिया का 4.66 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर रह गया है। इस प्रकार, दोनों देशों का बाजार पूंजीकरण पांच लाख करोड़ डॉलर के स्तर से नीचे आ गया है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका पहले, चीन दूसरे, जापान तीसरे और हांगकांग चौथे स्थान पर हैं।


निवेशकों का भरोसा

जून महीने में वैश्विक बाजारों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अर्धचालक क्षेत्र के शेयरों में तेजी के बाद, निवेशकों ने मुनाफावसूली की। इसका सबसे अधिक प्रभाव ताइवान और दक्षिण कोरिया पर पड़ा, जहां तकनीकी कंपनियों का बड़ा योगदान है। इसके विपरीत, भारत में निवेशकों का विश्वास अपेक्षाकृत मजबूत बना रहा है।


आंकड़ों का विश्लेषण

जून में भारत के बाजार पूंजीकरण में लगभग 2.75 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि दक्षिण कोरिया में लगभग 4.7 प्रतिशत और ताइवान में करीब 2.3 प्रतिशत की गिरावट आई। अमेरिका और चीन के बाजार स्थिर रहे, जबकि जापान, हांगकांग, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी में भी बाजार पूंजीकरण में कमी देखी गई।


कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट भारतीय बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में कमी से आयात बिल में कमी आ सकती है, जिससे महंगाई पर दबाव कम हो सकता है और अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है। यही कारण है कि निवेशकों का रुझान भारतीय शेयर बाजार की ओर बढ़ा है।


विदेशी निवेशकों की भागीदारी

हाल के दिनों में, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में निवेश बढ़ाया है। इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए उठाए गए कदमों ने भी बाजार की धारणा को मजबूत किया है। विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव में कमी और वैश्विक स्तर पर जोखिम की आशंकाओं में कमी से भी भारतीय बाजार को समर्थन मिला है।


भविष्य की संभावनाएं

हालांकि, 2026 की शुरुआत से अब तक के प्रदर्शन के अनुसार, भारत अभी भी कई बड़े वैश्विक बाजारों से पीछे है। इस अवधि में, दक्षिण कोरिया का बाजार पूंजीकरण लगभग 74 प्रतिशत और ताइवान का लगभग 52 प्रतिशत बढ़ा है। इसके मुकाबले, भारत का बाजार पूंजीकरण वर्ष की शुरुआत के स्तर से लगभग 4.8 प्रतिशत नीचे है।


निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, विदेशी निवेश का प्रवाह जारी रहता है और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार आने वाले महीनों में भी मजबूती दिखा सकता है। वर्तमान में, भारत का फिर से दुनिया के पांचवें सबसे बड़े शेयर बाजार के रूप में उभरना निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।