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भारत पर अमेरिका के नए टैरिफ प्रस्ताव का असर

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता के दौरान अमेरिका ने एक नए प्रावधान के तहत भारत पर टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव 50 से अधिक देशों पर लागू हो सकता है और इसका आधार बंधुआ मजदूरी से निर्मित उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का है। जानें इस प्रस्ताव के पीछे की वजहें और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता


नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता के दौरान, अमेरिका ने एक नए प्रावधान के तहत भारत पर टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के माध्यम से 50 से अधिक देशों पर टैरिफ लगाया जा सकता है। यह कदम अमेरिका के व्यापार कानून के सेक्शन 301 के अंतर्गत आया है, जिसके अनुसार बंधुआ मजदूरी से निर्मित उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।


अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि एक जून को भारत पहुंचे और दो जून से वार्ता शुरू हुई, जो तीन दिनों तक चलेगी। इस बीच, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने बताया कि भारत, सेक्शन 301 के तहत प्रस्तावित टैरिफ उपायों पर अमेरिका के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार फ्रेमवर्क समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं।


सूत्रों के अनुसार, अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि ने भारत समेत 60 अर्थव्यवस्थाओं की जांच की है और इसके बाद 1974 के व्यापार कानून के एक प्रावधान के तहत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है। भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि 'भारत, सेक्शन 301 की कार्यवाही के हिस्से के रूप में इस मामले पर अमेरिका के साथ लगातार बातचीत कर रहा है'। मंत्रालय ने आगे कहा कि भारत, फ्रेमवर्क समझौते को अंतिम रूप देने के संबंध में भी अमेरिका के साथ चर्चा में लगा हुआ है।