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भारत पर अमेरिकी शुल्क का खतरा: रूस से तेल खरीद पर प्रतिबंध

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने एक विधेयक पारित किया है, जो राष्ट्रपति ट्रंप को रूस पर प्रतिबंध लगाने और भारत समेत अन्य देशों पर भारी शुल्क लगाने का अधिकार देता है। इस विधेयक के तहत भारत पर 100 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया जा सकता है, जिससे भारतीय निर्यात पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। जीटीआरआई के अनुसार, यह कानून भारत की ऊर्जा नीति को प्रभावित कर सकता है और देश को अपनी ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहिए। जानें इस विधेयक के संभावित परिणाम और भारत की रणनीति क्या होनी चाहिए।
 

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का नया विधेयक

अमेरिका की प्रतिनिधि सभा ने एक विधेयक पारित किया है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस पर प्रतिबंध लगाने और भारत समेत उन देशों पर भारी शुल्क लगाने का अधिकार देता है, जो रूसी तेल और गैस खरीदते हैं। इस विधेयक के तहत भारत पर 100 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया जा सकता है, जैसा कि आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने बताया।


नए शुल्क का प्रभाव

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि भारतीय निर्यात पर नए शुल्क का वास्तविक प्रभाव अमेरिका द्वारा शुल्क दरों, उत्पादों की सूची और लागू करने की समयसीमा की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। अमेरिकी सीनेट ने पिछले महीने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' को मंजूरी दी थी, जिसे अब प्रतिनिधि सभा ने 262-159 मतों से पारित किया है।


भारत और चीन पर संभावित प्रभाव

यह कानून ट्रंप को चीन, भारत और अन्य देशों पर कड़े शुल्क लगाने का अधिकार देता है, ताकि वे रूसी तेल और गैस पर अपनी निर्भरता कम कर सकें। जीटीआरआई ने बताया कि यह कानून अमेरिका के राष्ट्रपति को रूस के कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े खरीदार देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने की अनुमति देता है। भारत और चीन, जो रूसी कच्चे तेल के प्रमुख खरीदार हैं, इसके संभावित निशाने पर हैं।


भारत की ऊर्जा नीति पर प्रभाव

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि नया अमेरिकी कानून भारत के खिलाफ व्यापार हथियार में बदल गया है। अमेरिका अब 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की धमकी दे सकता है, और इसके बाद भारत को रूसी तेल की खरीद कम करने के लिए मजबूर किया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत को अस्थायी शुल्क राहत के लिए अपनी ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहिए।


भविष्य की चुनौतियाँ

श्रीवास्तव ने कहा कि न तो व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करना और न ही रूसी तेल की खरीद रोकना, भारत को अमेरिकी कार्रवाई से बचा सकता है। उन्होंने उदाहरण दिया कि अमेरिका ने यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ व्यापार समझौते करने के बावजूद नए शुल्क लगाए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को अमेरिकी शुल्क की धमकियों को अपनी ऊर्जा नीति तय करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।


भारत की रणनीति

उन्होंने कहा कि जब तक रूसी तेल व्यावसायिक रूप से प्रतिस्पर्धी बना रहता है, भारत को उसकी खरीद जारी रखनी चाहिए और अमेरिका के साथ मजबूती से बातचीत करनी चाहिए, बिना एकतरफा व्यापार रियायतें दिए।