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भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा जहाज रीसाइक्लिंग केंद्र

भारत ने समुद्री क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया के सबसे बड़े जहाज रीसाइक्लिंग देश का दर्जा प्राप्त किया है। यूएनसीटैड की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जहाज रीसाइक्लिंग की मात्रा में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। केंद्र सरकार अलंग यार्ड के विस्तार के माध्यम से रीसाइक्लिंग क्षमता को और बढ़ाने की योजना बना रही है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इसे जिम्मेदार और टिकाऊ रीसाइक्लिंग केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
 

भारत की नई उपलब्धि


भारत ने समुद्री क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार करते हुए विश्व के सबसे बड़े जहाज रीसाइक्लिंग देश का दर्जा हासिल किया है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (यूएनसीटैड) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यह उपलब्धि निर्धारित समय से पहले प्राप्त की गई है।


रिकॉर्ड स्तर पर जहाज पुनर्चक्रण

यूएनसीटैड की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में 2025 तक जहाज रीसाइक्लिंग की मात्रा 2.99 मिलियन ग्रॉस टन तक पहुँच जाएगी, जो 2024 में 1.86 मिलियन ग्रॉस टन की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि के साथ, भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है। देश की हिस्सेदारी एक वर्ष में 30.1 प्रतिशत से बढ़कर 35.4 प्रतिशत हो गई है, जो समुद्री क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता और अंतरराष्ट्रीय विश्वास को दर्शाता है।


अलंग यार्ड का विस्तार

केंद्र सरकार अब जहाज रीसाइक्लिंग की क्षमता को और बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। गुजरात में स्थित अलंग शिप रीसाइक्लिंग यार्ड के विस्तार के माध्यम से इसे लगभग 9 मिलियन लाइट डिस्प्लेसमेंट टन तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए राज्य सरकार ने एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसमें बेहतर बुनियादी ढांचे का विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।


भविष्य की मांग के लिए तैयार

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह उपलब्धि भारत को एक जिम्मेदार और टिकाऊ जहाज रीसाइक्लिंग केंद्र के रूप में स्थापित करती है। बाल्टिक एंड इंटरनेशनल मैरीटाइम काउंसिल के अनुमान के अनुसार, अगले दस वर्षों में दुनिया भर में 16,000 से अधिक जहाजों का पुनर्चक्रण होगा। इस संदर्भ में, भारत हर वर्ष लगभग 500 से 600 जहाजों के रीसाइक्लिंग की क्षमता विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकेगी।