भारत बनेगा चीन और आसियान का प्रमुख निर्यातक: पीयूष गोयल
भारत का निर्यात भविष्य
(राजेश राय) द हेग, 27 अक्टूबर - वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आशा व्यक्त की है कि भारत आने वाले वर्षों में चीन और आसियान देशों को वस्तुओं और सेवाओं का प्रमुख निर्यातक बनकर उभरेगा। गोयल ने बताया कि उन्होंने कैमरून के याउंडे और नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के अपने समकक्ष के साथ बातचीत की। उन्होंने कहा कि भारत सभी देशों के साथ मुक्त और निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देने के लिए तत्पर है।
गोयल ने संवाददाताओं से कहा, 'चीन हमें महत्वपूर्ण मध्यवर्ती वस्तुएं और कच्चा माल प्रदान कर रहा है। यदि किसी विशेष उत्पाद में हमें निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा या मूल्य निर्धारण में समस्या होती है, तो इसके लिए एक स्थापित न्यायिक प्रक्रिया है जिसका पालन किया जाता है। हम निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के नियमों और खुले व्यापार के सिद्धांतों में विश्वास करते हैं। हम भारत की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आपूर्तिकर्ताओं का स्वागत करते हैं।'
मंत्री ने यह बातें भारत-चीन व्यापार संबंधों के संदर्भ में कही। वह दो दिन की आधिकारिक यात्रा पर हैं। उन्होंने आगे कहा, 'हम अपनी वस्तुओं और सेवाओं के लिए विभिन्न देशों के बाजारों को पारस्परिक आधार पर खोलने की दिशा में काम कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में भारत चीन और आसियान क्षेत्र में वस्तुओं और सेवाओं का प्रमुख निर्यातक बनेगा।'
दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमा, फिलीपीन, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं।
मंत्री की यह टिप्पणी 14 अक्टूबर को दिए गए उनके बयान के लगभग दो सप्ताह बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत चीन के साथ अपने संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। दोनों देशों ने पिछले कुछ महीनों में अपने संबंधों को सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था।
गोयल की टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर चिंता जताई है। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 7.9 प्रतिशत बढ़कर 127.7 अरब डॉलर हो गया।
वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 118.39 अरब डॉलर था। चीन को भारत का निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 36.62 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष 14.25 अरब डॉलर था। इस दौरान आयात 16 प्रतिशत बढ़कर 131.62 अरब डॉलर हो गया।
इससे व्यापार घाटा पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर 99.19 अरब डॉलर हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 85 अरब डॉलर था। यह भारत के लिए चिंता का विषय है। चीन से निवेश को लेकर भी मुद्दे हैं, क्योंकि भारत ने भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति को सख्त किया है।
चीन द्वारा सुरंग खोदने वाली मशीनों सहित प्रमुख मशीनरी के निर्यात पर नए नियंत्रणों के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा, 'हम इस पर काम करेंगे।' सुरंग खोदने वाली मशीनों (टीबीएम) और उनसे संबंधित वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंधों का भारत की कई परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है, जिनमें भूमिगत मेट्रो प्रणालियां, उच्च गति वाली रेल लाइनें और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरंगों का निर्माण शामिल है।