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भारत में BNPL ट्रेंड: युवा कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं

भारत में बाय नाउ पे लेटर (BNPL) का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे युवा बिना सोचे-समझे खर्च करने की आदत में फंसते जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल लोन बाजार 29 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। लगभग 19 करोड़ लोगों के पास सक्रिय लोन हैं, जिनमें से अधिकांश युवा छोटे लोन का उपयोग कर रहे हैं। आरबीआई ने इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नए नियम लागू किए हैं। जानें इस ट्रेंड के पीछे के कारण और इसके संभावित खतरों के बारे में।
 

डिजिटल फिनटेक में नया ट्रेंड

भारत के डिजिटल फिनटेक क्षेत्र में एक नया चलन तेजी से उभर रहा है। शॉपिंग वेबसाइटों पर कपड़े चुनने से लेकर फूड ऐप्स पर खाना ऑर्डर करने तक, हर जगह भुगतान के लिए एक सरल विकल्प उपलब्ध है, जिसे बाय नाउ पे लेटर (BNPL) कहा जाता है। यह सुविधा केवल 500 रुपये की छोटी खरीदारी से शुरू होती है और देखने में आकर्षक लगती है। लेकिन यह तेजी से युवाओं को कर्ज के जाल में फंसा रही है। इस सुविधा के कारण बिना सोचे-समझे खर्च करना युवाओं की आदत बनता जा रहा है। 'प्रोडक्ट ग्रोथ' द्वारा जारी डिजिटल लेंडिंग ट्रेंड्स रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डिजिटल लोन बाजार अब 29 लाख करोड़ रुपये का हो चुका है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बिना तुरंत भुगतान किए सामान खरीदने की आदत युवाओं में तेजी से बढ़ रही है।


लोन की बढ़ती संख्या

भारत में लगभग 19 करोड़ लोगों के पास सक्रिय लोन या क्रेडिट की सुविधा है। इनमें से 12 से 14 करोड़ लोग केवल छोटे समय के लोन या BNPL जैसी सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं। इस प्रकार के लोन पर ब्याज दर 12 से 24 प्रतिशत के बीच होती है, जो सामान्य क्रेडिट कार्ड से थोड़ी कम है। यही कारण है कि कॉलेज के छात्र और नए नौकरीपेशा युवा इसे पसंद करते हैं, क्योंकि उनके पास आमतौर पर कोई आय या क्रेडिट कार्ड नहीं होता। इसलिए, 500 या 1000 रुपये की छोटी राशि को किस्तों में चुकाना उनके लिए आसान लगता है।


लोन की त्वरित उपलब्धता

BNPL के बढ़ने का मुख्य कारण देश का नया डिजिटल बैंकिंग ढांचा और फिनटेक कंपनियों की तकनीक है। भारत में अब डिजिटल केवाईसी और अकाउंट एग्रीगेटर सिस्टम लागू हो चुका है। इसका अर्थ है कि ऐप पर आने वाले हर दो में से एक ग्राहक को आसानी से लोन की सीमा मिल जाती है। इस सरल प्रक्रिया के कारण छोटे शहरों के युवा इस छोटे कर्ज का सबसे अधिक उपयोग कर रहे हैं। इनकी मासिक आय 15,000 से 50,000 रुपये के बीच होती है, और वे अपनी दैनिक जरूरतों और शौक को पूरा करने के लिए यह लोन लेते हैं। डिजिटल सिस्टम की मजबूती के कारण कंपनियों को लोन मंजूर करने में केवल 2 से 3 घंटे लगते हैं।


कर्ज चुकाने में कठिनाई

डिजिटल लोन ने युवाओं के खर्च करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। पहले लोग पैसे देखकर खरीदारी करते थे, लेकिन अब 'पहले खर्च करो, बाद में सोचो' की मानसिकता हावी हो गई है। कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए 200 से 500 रुपये तक के ऑफर देती हैं, और 40 से 60 प्रतिशत लोग 6 महीने के भीतर फिर से लोन ले लेते हैं। इस कारण डिजिटल लोन का बाजार हर साल 40 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ रहा है। चिंता की बात यह है कि समय पर लोन चुकाने में असफल लोगों की संख्या 2 से 5 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो दर्शाता है कि युवा अपनी आय से अधिक खर्च कर रहे हैं और कर्ज में डूब रहे हैं।


आरबीआई की नई नीतियाँ

भारतीय रिजर्व बैंक ने अब डिजिटल लोन से संबंधित नियमों को कड़ा कर दिया है। अब लोन की राशि सीधे ग्राहक के बैंक खाते में आनी चाहिए, और किसी तीसरे ऐप का हस्तक्षेप नहीं होगा। कंपनियों को लोन की कुल लागत और छिपी हुई फीस के बारे में ग्राहकों को स्पष्ट जानकारी देनी होगी। आरबीआई ने डेटा सुरक्षा पर भी सख्ती की है, जिससे कोई ऐप बिना आवश्यकता के फोन का डेटा नहीं ले सकता। अब केवल लाइसेंस प्राप्त कंपनियां ही डिजिटल लोन दे सकती हैं, जिससे फर्जी ऐप्स पर पूरी तरह से रोक लग गई है।