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भारत में ई-85 ईंधन का शुभारंभ: वैकल्पिक ऊर्जा की दिशा में एक कदम

केंद्र सरकार ने ई-85 ईंधन का शुभारंभ किया है, जो उच्च इथेनॉल मिश्रित है और पेट्रोल पर निर्भरता को कम करने में मदद करेगा। यह ईंधन विशेष रूप से लचीले ईंधन तकनीक वाले वाहनों के लिए बनाया गया है। ई-85 का उपयोग करने से पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि यह पारंपरिक पेट्रोल वाहनों की तुलना में कम हरितगृह गैस उत्सर्जन करता है। इसके अलावा, सरकार का लक्ष्य है कि ई-85 की आपूर्ति को बढ़ाकर इथेनॉल मिश्रण का स्तर 2030-31 तक 26 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए।
 

ई-85 ईंधन का शुभारंभ

केंद्र सरकार ने वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के लिए एक नई मिश्रित ईंधन प्रणाली की शुरुआत की है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नई दिल्ली में एक खुदरा ईंधन केंद्र पर ई-85 ईंधन का उद्घाटन किया। सरकार का मानना है कि इससे पेट्रोल पर निर्भरता कम होगी और प्रदूषण तथा विदेशी मुद्रा पर दबाव भी घटेगा।


ई-85 ईंधन की विशेषताएँ

ई-85 एक उच्च इथेनॉल मिश्रित ईंधन है, जिसमें 80 से 85 प्रतिशत इथेनॉल और 14 से 19 प्रतिशत पेट्रोल शामिल है। यह विशेष रूप से उन वाहनों के लिए बनाया गया है जो इथेनॉल और पेट्रोल के विभिन्न अनुपातों पर चलने में सक्षम हैं।


लचीले ईंधन तकनीक का महत्व

ई-85 ईंधन का शुभारंभ ऐसे समय में हुआ है जब देश की पहली यात्री श्रेणी की लचीले ईंधन तकनीक वाली कार भी पेश की गई थी। ये वाहन 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित ईंधन से लेकर पूरी तरह इथेनॉल आधारित ईंधन तक विभिन्न मिश्रणों पर चल सकते हैं।


ई-85 की कीमत और लाभ

ई-85 की कीमत सामान्य पेट्रोल की तुलना में लगभग 20 रुपये प्रति लीटर कम रखी गई है। सरकार का उद्देश्य देश में उत्पादित इथेनॉल का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है, जिससे वाहन मालिकों को ईंधन खर्च में राहत मिलेगी।


पर्यावरणीय लाभ

पर्यावरण के दृष्टिकोण से, ई-85 ईंधन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ई-85 पर चलने वाले वाहन पारंपरिक पेट्रोल वाहनों की तुलना में जीवनचक्र के दौरान लगभग 61 प्रतिशत तक कम हरितगृह गैस उत्सर्जन करते हैं। इसके अलावा, इस ईंधन से सूक्ष्म कणों का उत्सर्जन भी बहुत कम होता है, जिससे वायु प्रदूषण में कमी आ सकती है।


नीति आयोग की मान्यता

नीति आयोग भी उच्च इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने वाले वाहनों को शून्य उत्सर्जन श्रेणी में शामिल करता है। सरकार का मानना है कि यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।


ई-85 का उपयोग

हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि ई-85 ईंधन सामान्य पेट्रोल वाहनों में नहीं डाला जा सकता है। यह केवल विशेष रूप से तैयार किए गए लचीले ईंधन तकनीक वाले वाहनों के लिए उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि ई-20 और ई-85 दो अलग-अलग प्रकार के ईंधन हैं।


इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का विकास

भारत में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। 2014 में पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण केवल 1.53 प्रतिशत था, जो अब 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। सरकार का कहना है कि यह लक्ष्य निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले हासिल किया गया है।


ई-85 की आपूर्ति योजना

ई-85 ईंधन की आपूर्ति प्रारंभ में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के 48 केंद्रों पर शुरू होगी। इसके बाद दिसंबर 2026 तक इसे 500 केंद्रों और दिसंबर 2027 तक लगभग 5000 केंद्रों तक बढ़ाने की योजना है। सरकार को उम्मीद है कि इससे वर्ष 2030-31 तक देश में कुल इथेनॉल मिश्रण का स्तर लगभग 26 प्रतिशत तक पहुंच सकेगा।