भारत में ईंधन की कीमतों में वृद्धि: व्यापारियों की राहत की मांग
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि पर चिंता
भारत में पिछले एक सप्ताह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आम जनता और व्यापारी दोनों ही इस स्थिति से चिंतित हैं। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने सरकार से अनुरोध किया है कि ईंधन की कीमतों में 10 से 15 रुपये प्रति लीटर की कमी की जाए ताकि जनता को तात्कालिक राहत मिल सके।
CTI के अध्यक्ष का केंद्रीय मंत्री को पत्र
CTI के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाने के लिए त्वरित कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों की एक आपात बैठक बुलाने का भी सुझाव दिया है, ताकि इस वित्तीय दबाव को कम करने के उपायों पर चर्चा की जा सके।
वैट में कमी का सुझाव
गोयल ने सुझाव दिया है कि सभी राज्यों को अगले तीन महीनों के लिए पेट्रोल और डीजल पर वैट को घटाकर 5 प्रतिशत करना चाहिए। CTI का मानना है कि इस कदम से ईंधन की कीमतें 10 से 15 रुपये प्रति लीटर तक कम हो सकती हैं, जिससे महंगाई से प्रभावित आम लोगों, ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों को राहत मिलेगी।
दामों में चार बार वृद्धि
पिछले 10 दिनों में ईंधन की कीमतों में चार बार वृद्धि की गई है। पहली बार 15 मई को पेट्रोल-डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर बढ़े थे। इसके बाद 19 मई को कीमतें लगभग 90 पैसे बढ़ीं, 23 मई को 87 पैसे की वृद्धि हुई, और फिर अगले 48 घंटों में कीमतें 2 रुपये से अधिक बढ़ गईं। इस प्रकार, इस छोटी अवधि में तेल के दाम लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं।
कांग्रेस नेता का सरकार पर हमला
इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि सरकार धीरे-धीरे कीमतें बढ़ा रही है ताकि जनता को इस आर्थिक झटके का तुरंत अहसास न हो। उन्होंने कहा कि इस महंगाई से आम परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है और भविष्य में कीमतों में और वृद्धि की संभावना है।