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भारत में ईंधन नीति में बदलाव: इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा

भारत में ईंधन नीति में महत्वपूर्ण बदलाव की प्रक्रिया शुरू हुई है, जिसमें इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने के लिए नए नियमों का मसौदा पेश किया गया है। इस मसौदे में ई 85 और ई 100 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों को शामिल करने का प्रस्ताव है। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल के व्यापक उपयोग की वकालत की है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। जानें इस बदलाव का आम वाहन खरीदारों पर क्या प्रभाव पड़ेगा और भविष्य में क्या संभावनाएं हैं।
 

ईंधन नीति में नया बदलाव

भारत में ईंधन नीति और वाहन नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव की प्रक्रिया शुरू हुई है, जो परिवहन क्षेत्र को नया दिशा दे सकती है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन के लिए एक मसौदा अधिसूचना जारी की है। इस मसौदे का मुख्य उद्देश्य बढ़ते इथेनॉल मिश्रण और वैकल्पिक ईंधनों के संदर्भ में नियमों को अद्यतन करना है, ताकि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार व्यवस्था को तैयार किया जा सके।


उच्च इथेनॉल मिश्रण का प्रस्ताव

इस मसौदे में पहली बार ई 85 और ई 100 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों को औपचारिक रूप से शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया है। जानकारी के अनुसार, भारत ने वर्ष 2025 तक ई 20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल करने की योजना बनाई है। यह नया कदम भविष्य में इथेनॉल के अधिक उपयोग की दिशा में एक प्रारंभिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि ई 85 या ई 100 का तत्काल उपयोग शुरू नहीं किया जाएगा, बल्कि यह केवल परीक्षण और मूल्यांकन के लिए नियामक ढांचे की तैयारी है।


ईंधन की परिभाषा में बदलाव

मसौदे में ईंधन की परिभाषा और उत्सर्जन मानकों में भी बदलाव का प्रस्ताव है। पेट्रोल वाहनों के लिए ईंधन का विवरण अब पुराने प्रारूप से बदलकर ई 10 और ई 20 के अनुरूप किया जाएगा, जिससे वर्तमान राष्ट्रीय मानकों के साथ तालमेल बैठ सके। इसके अतिरिक्त, हाइड्रोजन ईंधन की श्रेणी में भी संशोधन किया गया है, जहां पुराने शब्दों की जगह नई शब्दावली को शामिल किया गया है। बायोडीजल के संदर्भ में भी बी 10 से बढ़ाकर बी 100 तक के विकल्प को शामिल करने का प्रस्ताव है, जो वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने की नीति को दर्शाता है।


वाहनों के वजन में बदलाव

एक और महत्वपूर्ण बदलाव के तहत कुछ श्रेणियों में वाहनों के कुल वजन की सीमा 3000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3500 किलोग्राम करने का प्रस्ताव है, जिससे उत्सर्जन नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सके। इस मसौदे पर आम जनता और संबंधित पक्षों से 30 दिनों तक सुझाव मांगे गए हैं, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।


सरकार की व्यापक नीति का हिस्सा

यह पहल सरकार की व्यापक नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करना और स्वदेशी व स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा देना है। ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों में पहले से ही ई 85 और ई 100 जैसे ईंधनों का उपयोग हो रहा है, खासकर फ्लेक्स फ्यूल वाहनों में। भारत में भी इस दिशा में वाहन निर्माताओं और तेल कंपनियों के साथ बातचीत जारी है, ताकि इंजन की अनुकूलता, वितरण व्यवस्था और लागत जैसे पहलुओं का आकलन किया जा सके।


भविष्य की संभावनाएं

सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पहले भी इथेनॉल के व्यापक उपयोग की वकालत की है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में भारत 100 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण की दिशा में आगे बढ़ सकता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता घटेगी।


आम वाहन खरीदारों पर प्रभाव

हालांकि, आम वाहन खरीदारों के लिए इस मसौदे का कोई तात्कालिक प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि वर्तमान में ई 20 ही मानक ईंधन बना हुआ है। लेकिन यह संकेत है कि आने वाले समय में फ्लेक्स फ्यूल वाहन अधिक सामान्य हो सकते हैं और लोगों को ईंधन के विकल्प भी बढ़ सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आवश्यक ढांचे के विकसित होने तक कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा।