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भारत में ऊर्जा भंडारण क्षमता को बढ़ाने के लिए 14,500 करोड़ रुपये की योजना

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है, जो भारत में ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता को बढ़ाने के लिए है। इस योजना के तहत 92 गीगावाट घंटे की ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी, जिसमें बैटरी और पंप जल भंडारण शामिल हैं। इससे देश में ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण बेहतर होगा। जानें इस योजना के प्रमुख पहलुओं के बारे में।
 

प्रधानमंत्री मोदी की नई ऊर्जा भंडारण योजना

नई दिल्ली, चार नवंबर: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को देश में ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता को बढ़ाने के लिए 14,500 करोड़ रुपये की योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने पर खुशी व्यक्त की। यह योजना वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू होगी और इसके तहत 92 गीगावाट घंटे की ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी।


इस योजना में 30 गीगावाट घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, 60 गीगावाट घंटे की पंप जल भंडारण परियोजनाएं और दो गीगावाट घंटे की नई भंडारण प्रौद्योगिकियों को समर्थन दिया जाएगा। मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, 'अधिक भंडारण, कम आयात और देश को चौबीस घंटे बिजली। मंत्रिमंडल ने 92 गीगावाट घंटे की ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने के लिए 14,500 करोड़ रुपये की बड़ी योजना को मंजूरी दी है।'


इससे लगभग एक लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि योजना की मुख्य विशेषताओं में 60 गीगावाट घंटे की पंप जल भंडारण क्षमता, 30 गीगावाट घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता और उभरती प्रौद्योगिकियों के माध्यम से दो गीगावाट घंटे की क्षमता विकसित करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, बैटरी भंडारण परियोजनाओं में कम से कम 40 प्रतिशत घरेलू सामग्री का उपयोग किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा, 'इससे निश्चित रूप से अधिक भरोसेमंद बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर एकीकरण और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।'